PCOS से परेशान महिलाओं के लिए खुशखबरी, AIIMS रिसर्च में बड़ा खुलासा
AIIMS नई दिल्ली की रिसर्च में पाया गया कि 12 सप्ताह तक नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान करने से PCOS या PMOS से पीड़ित महिलाओं में हार्मोनल संतुलन बेहतर हुआ.
नई दिल्ली: महिलाओं में तेजी से बढ़ रही पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) की समस्या को लेकर नई उम्मीद सामने आई है. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली में हुई एक रिसर्च में पाया गया है कि नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान करने से इस बीमारी के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार PCOS को अब पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) के नाम से भी जाना जाने लगा है. यह समस्या महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकती है और कई मामलों में बांझपन का कारण भी बन सकती है. खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और असंतुलित जीवनशैली इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं.
कितनी महिलाओं पर हुआ रिसर्च?
रिसर्च में 100 से अधिक महिलाओं को शामिल किया गया. इन महिलाओं ने 12 सप्ताह तक सप्ताह में पांच दिन और प्रतिदिन 90 मिनट योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया. अध्ययन के दौरान उनके स्वास्थ्य से जुड़े कई पहलुओं की जांच की गई.
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रिसर्च के नतीजों में पाया गया कि नियमित योग करने वाली महिलाओं में हार्मोनल संतुलन बेहतर हुआ. उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम हुआ, जिससे चेहरे और शरीर पर अनचाहे बालों की वृद्धि में कमी देखी गई. मुंहासों की समस्या भी कम हुई. कई महिलाओं के मासिक धर्म चक्र में सुधार हुआ और पीरियड समय पर आने लगे.
अध्ययन में क्या आया सामने?
अध्ययन में यह भी सामने आया कि योग का असर केवल हार्मोन तक सीमित नहीं रहा. महिलाओं के वजन में कमी दर्ज की गई और शरीर की इंसुलिन को उपयोग करने की क्षमता बेहतर हुई. इससे ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिली. कोलेस्ट्रॉल और अन्य मेटाबॉलिक संकेतकों में भी सकारात्मक बदलाव देखे गए.
विशेषज्ञों ने बताया कि योग और ध्यान का मानसिक स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ा. अध्ययन में शामिल महिलाओं में तनाव और डिप्रेशन के लक्षणों में कमी देखी गई. इससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ.
रिसर्च के अनुसार बद्ध कोणासन, सेतु बंधासन, कोबरा मुद्रा, नौकासन, मलासन और सूर्य नमस्कार जैसे योगासन PMOS और PCOS से जूझ रही महिलाओं के लिए लाभकारी हो सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अभ्यास और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह भी लेनी चाहिए.