मां सिख, पिता ईसाई, भाई मुस्लिम और पत्नी हिंदू... खुद किस धर्म को मानते हैं बॉलीवुड के ये मशहूर एक्टर?

बॉलीवुड एक्टर विक्रांत मैसी की जिंदगी मेहनत और विविधता की मिसाल है. अलग अलग धर्मों वाले परिवार से आने वाले इस एक्टर ने OTT के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

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Babli Rautela

मुंबई: 3 अप्रैल 1987 को मुंबई में जन्मे विक्रांत मैसी आज किसी पहचान के मौहताज नहीं हैं. एक्टर का बचपन एक साधारण परिवार में बीता. उनके घर में आर्थिक सादगी थी, लेकिन सपनों की कोई कमी नहीं थी. बचपन से ही उन्हें डांस और एक्टिंग का शौक था. उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई सेंट एंथनी हाई स्कूल से पूरी की और फिर आर डी नेशनल कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. कॉलेज के दिनों में ही उन्हें समझ आ गया था कि उनका असली जुनून परफॉर्मिंग आर्ट्स में है. डांस की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ने उनके कॉन्फिडेंस को बढ़ाया और यही आत्मविश्वास उन्हें धीरे धीरे एक्टिंग की दुनिया में ले गया.

विक्रांत मैसी ने अपने करियर की शुरुआत साल 2007 में टीवी शो धूम मचाओ धूम से की. इसके बाद उन्होंने धरम वीर और बालिका वधू जैसे पॉपुलर सीरियल्स में काम किया और अपनी अलग पहचान बनाई.

टीवी से विक्रांत मैसी ने बनाई पहचान

टीवी पर पहचान बनाने के बाद उन्होंने फिल्मों की ओर कदम बढ़ाया. साल 2013 में फिल्म लुटेरा से उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री ली. इसके बाद दिल धड़कने दो और ए डेथ इन द गंज जैसी फिल्मों में नजर आए. इन फिल्मों में भले ही उनके रोल छोटे थे, लेकिन उनकी एक्टिंग ने दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों का ध्यान खींचा.

विक्रांत मैसी को असली पहचान OTT प्लेटफॉर्म से मिली. खासतौर पर मिर्जापुर में निभाया गया बबलू पंडित का किरदार उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इसके बाद क्रिमिनल जस्टिस और ब्रोकन बट ब्यूटीफुल जैसी वेब सीरीज में उन्होंने शानदार अभिनय किया. OTT ने उन्हें अलग अलग तरह के किरदार निभाने का मौका दिया, जिससे उनकी एक्टिंग और भी निखर कर सामने आई. आज उन्हें इंडस्ट्री के सबसे नेचुरल और भरोसेमंद एक्टर्स में गिना जाता है.

एक ही घर में चार धर्मों की मिसाल

विक्रांत मैसी का परिवार भारत की विविधता का जीता जागता उदाहरण है. उनके पिता ईसाई हैं और चर्च जाते हैं, जबकि उनकी मां सिख धर्म से जुड़ी हैं. उनके बड़े भाई ने इस्लाम धर्म अपना लिया. वहीं उनकी पत्नी शीतल ठाकुर हिंदू हैं. इस तरह उनके घर में अलग अलग धर्मों का खूबसूरत संगम देखने को मिलता है.उनके घर में हर त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है. यही वजह है कि बचपन से ही विक्रांत को इंसानियत और एकता की अहमियत समझ आई.