नई दिल्ली: 1993 मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों को लेकर वरिष्ठ वकील और सांसद उज्ज्वल निकम का एक बयान फिर चर्चा में है. अपनी आने वाली फिल्म 'प्रहार' के कारण भी सुर्खियों में चल रहे निकम ने एक इंटरव्यू में कहा कि यदि अभिनेता संजय दत्त ने समय रहते पुलिस को अहम जानकारी दी होती, तो धमाकों की साजिश का खुलासा पहले हो सकता था. उनके इस बयान के बाद एक बार फिर तीन दशक पुराने मामले को लेकर बहस तेज हो गई है.
एक बातचीत के दौरान उज्ज्वल निकम से पूछा गया कि क्या संजय दत्त उस समय हुई घटना को रोकने में कोई भूमिका निभा सकते थे. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि धमाकों से पहले अबू सालेम हथियारों की खेप लेकर आया था, जिसमें एके-47 राइफल और हैंड ग्रेनेड जैसे हथियार शामिल थे. निकम के अनुसार, संजय दत्त ने इनमें से कुछ हथियार अपने पास रखे थे, जबकि बाद में हैंड ग्रेनेड वापस कर दिए गए थे.
निकम का कहना है कि यदि संजय दत्त ने उसी समय पुलिस को इन हथियारों की जानकारी दे दी होती, तो जांच एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो सकती थीं. उनके मुताबिक, ऐसा होने पर साजिश में शामिल लोगों तक समय रहते पहुंचना आसान हो जाता और पूरे नेटवर्क का खुलासा पहले ही संभव हो सकता था. उन्होंने यह भी कहा कि इससे बड़ी त्रासदी को टालने की संभावना बन सकती थी.
इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या समय पर सूचना मिलने से कई लोगों की जान बच सकती थी, तो निकम ने इससे सहमति जताई. उन्होंने कहा कि उनके अनुसार सबसे बड़ी चूक यही थी कि पुलिस को समय रहते जानकारी नहीं दी गई. उनका मानना है कि यदि ऐसा होता, तो घटनाक्रम अलग दिशा ले सकता था और जांच को शुरुआती स्तर पर महत्वपूर्ण बढ़त मिल सकती थी.
गंभीर टिप्पणी के साथ उज्ज्वल निकम ने यह भी स्पष्ट किया कि वह संजय दत्त को आतंकवादी नहीं मानते. उन्होंने कहा कि अभिनेता का उद्देश्य किसी आतंकी गतिविधि में शामिल होना नहीं था. निकम के अनुसार, संजय दत्त को हथियार रखने का शौक था और इसी वजह से उन्होंने वे हथियार अपने पास रखे, जिसके कारण बाद में उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा.
निकम का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब उनकी जीवन यात्रा पर आधारित फिल्म 'प्रहार' चर्चा में है. फिल्म में अभिनेता राजकुमार राव उनका किरदार निभा रहे हैं. वहीं, 1993 मुंबई बम धमाकों से जुड़ा यह मामला भारत के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है. निकम की नई टिप्पणी के बाद एक बार फिर उस दौर की घटनाओं और जांच प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है.