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शाहरुख खान पर फिदा थीं स्कूल टीचर्स! पढ़ें किंग खान के स्कूल के दिनों के दिलचस्प किस्से

Shah Rukh Khan Birthday Special: बॉलीवुड में जब भी किंग का जिक्र होता है, तो शाहरुख खान का नाम ही जहन में आता है. वो अपनी एक्टिंग, रोमांटिक अंदाज और कमाल के व्यक्तित्व से लाखों लोगों को दीवाना बना चुके हैं.

Shilpa Shrivastava
शाहरुख खान पर फिदा थीं स्कूल टीचर्स! पढ़ें किंग खान के स्कूल के दिनों के दिलचस्प किस्से
Courtesy: ChatGPT AI

Shah Rukh Khan Birthday Special: बॉलीवुड में जब भी किंग का जिक्र होता है, तो शाहरुख खान का नाम ही जहन में आता है. वो अपनी एक्टिंग, रोमांटिक अंदाज और कमाल के व्यक्तित्व से लाखों लोगों को दीवाना बना चुके हैं. फैन्स इनके बारे में काफी कुछ जानते हैं, लेकिन आज भी कुछ ऐसे राज हैं, जो शायद कुछ लोग नहीं जानते होंगे. इन्हीं में से एक है कि फिल्मों में आने से पहले ही शाहरुख अपने स्कूल में इतने लोकप्रिय थे कि उनके जूनियर मजाक में कहते थे कि लड़कों को टीचर्स पर क्रश होता है, लेकिन उनके स्कूल में टीचर्स का क्रश शाहरुख खान थे. 

शाहरुख खान के स्कूल में उनके जूनियर रहे लेखक और फोटोग्राफर अजय जैन ने एक किस्सा शेयर किया था. बता दें कि अजय दिल्ली के मशहूर सेंट कोलंबा स्कूल में शाहरुख से तीन साल जूनियर थे. चलिए जानते हैं शाहरुख के स्कूल के मजेदार किस्से.

स्कूल में हर तरफ थी शाहरुख खान की चर्चा:

शाहरुख स्कूल के दिनों से ही बाकी छात्रों से काफी अलग थे. वह पढ़ाई में अच्छे थे. हालांकि, वह क्लास के टॉपर नहीं थे, लेकिन उनके नंबर अच्छे आते थे. इसके अलावा खेलकूद में भी उनकी काफी रुचि थी. शाहरुख स्कूल की तरफ से हॉकी, फुटबॉल और क्रिकेट खेलते थे. डिबेट और ड्रामेटिक्स में भी उनकी अच्छी पकड़ थी. उनकी पर्सनैलिटी और आत्मविश्वास के कारण स्कूल में हर कोई उन्हें जानता था.

शाहरुख के स्कूल का एक मजेदार किस्सा है। जिस स्कूल में वो पढ़ते थे, वो केवल लड़कों का स्कूल था. ऐसे स्कूलों में लड़कों का अपनी महिला शिक्षिकाओं को पसंद करना आम बात है. लेकिन शाहरुख के मामले में मजाक बिल्कुल उलटा था. छात्र कहते थे कि स्कूल की टीचर्स को शाहरुख पर क्रश है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह स्कूल में कितने लोकप्रिय थे.

स्कूल के नाटक में निभाया था लीड रोल:

शाहरुख खान को शुरू से ही एक्टिंग का बहुत शौक था. स्कूल में आयोजित एक नाटक 'द विज' में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी. यह नाटक मशहूर कहानी 'द विजार्ड ऑफ ओज' पर आधारित था. दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में इस नाटक का मंचन हुआ था. यह कार्यक्रम करीब एक सप्ताह तक चला. इसे दर्शकों से प्रतिक्रिया भी काफी अच्छी मिली. 

शाहरुख को मिला था स्कूल का सबसे बड़ा सम्मान:

शाहरुख खान केवल एक्टिंग और खेलों में ही अच्छे नहीं थे, बल्कि उन्हें पढ़ाई और दूसरी एक्टिविटिज में भी अच्छा प्रदर्शन करने के लिए जाना जाता था. स्कूल में उन्हें 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया गया था. यह सम्मान 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले उस छात्र को दिया जाता है, जो पढ़ाई, खेल और अन्य एक्टिविटिज में बेहतरीन प्रदर्शन करता है. यानी यह पुरस्कार स्कूल के सबसे अच्छे ऑलराउंडर छात्र को मिलता था.

शाहरुख के बैच में किसी को इस बात पर शक नहीं था कि यह सम्मान उन्हें ही मिलेगा. आखिरकार शाहरुख ने यह पुरस्कार अपने नाम कर लिया. यह दिखाता है कि उनकी प्रतिभा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी.

सेंट स्टीफंस कॉलेज के इंटरव्यू से जुड़ा दिलचस्प किस्सा:

शाहरुख खान के कॉलेज में दाखिले से जुड़ी एक कहानी भी काफी मशहूर है. हालांकि, इस किस्से को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं थी. खबरों के अनुसार, 12वीं के बाद शाहरुख दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिले के लिए इंटरव्यू देने पहुंचे थे. वहां उन्होंने अपनी उपलब्धियों के बारे में बताते हुए स्वॉर्ड ऑफ ऑनर जीतने का जिक्र किया.

इंटरव्यू पैनल के एक सदस्य ने कहा कि सेंट कोलंबा स्कूल का यह पुरस्कार उनके कॉलेज के लिए ज्यादा मायने नहीं रखता. इस पर शाहरुख ने कथित तौर पर जवाब दिया कि फिर आपके कॉलेज का भी कोई खास महत्व नहीं है और वह वहां से चले गए. हालांकि, इस किस्से की पुष्टि नहीं हुई है. बाद में शाहरुख ने हंसराज कॉलेज में दाखिला लिया था.

सुपरस्टार बनने के बाद भी नहीं भूले अपने टीचर्स:

शाहरुख की सबसे अच्छी बात उनका व्यवहार था. इतनी लोकप्रियता के बावजूद वह कभी घमंडी या बदतमीज नहीं थे. वह अपने शिक्षकों का हमेशा सम्मान करते थे. स्कूल के टीचर ब्रदर डी'सूजा का भी एक खास किस्सा साझा किया गया था. उनके मुताबिक, शाहरुख ने एक टीवी कार्यक्रम में अपने शिक्षक का जिक्र किया था और बताया था कि उन्होंने उनके व्यक्तित्व को बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई. कहा जाता है कि यह बात खास थी कि दुनिया का बड़ा सुपरस्टार बनने के बाद भी शाहरुख अपने पुराने शिक्षकों को नहीं भूले.