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चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को बड़ा झटका, जानें कब तक पुलिस के सामने करना होगा सरेंडर?

दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में बॉलीवुड के नामी एक्टर राजपाल यादव को कड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने बार बार भुगतान का वादा तोड़ने पर उन्हें 4 फरवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया है.

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Edited By: Babli Rautela
चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को बड़ा झटका, जानें कब तक पुलिस के सामने करना होगा सरेंडर?
Courtesy: Social Media

मुंबई: चेक बाउंस मामलों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बॉलीवुड के जाने माने एक्टर राजपाल यादव के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि बार बार कोर्ट को दिए गए आश्वासनों के बावजूद बकाया रकम का भुगतान नहीं किया गया. इसी वजह से अब नरमी दिखाने का कोई कारण नहीं बचता है. दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को निर्देश दिया है कि वह 4 फरवरी 2026 को शाम 4 बजे तक संबंधित जेल अधीक्षक के सामने सरेंडर करें. कोर्ट ने कहा कि उन्हें निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को अब भुगतना होगा. यह आदेश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने पारित किया.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता कंपनी M s मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान करने के लिए कई बार वादा किया, लेकिन हर बार वह अपने शब्दों से पीछे हटे हैं. अदालत के अनुसार यह व्यवहार निंदनीय है और इससे न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बनता है.

सात मामलों में थी बड़ी देनदारी

कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक राजपाल यादव के खिलाफ कुल 7 मामले चल रहे हैं. इन सभी मामलों में उन्हें हर केस के लिए 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान करना था. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि रजिस्ट्रार जनरल के पास पहले से जमा की गई रकम शिकायतकर्ता को जारी की जाए.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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अदालत ने बताया कि अक्टूबर 2025 में 75 लाख रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा किए गए थे. इसके बावजूद अभी भी करीब 9 करोड़ रुपये की रकम बकाया है. कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी देनदारी के बावजूद भुगतान न करना गंभीर मामला है.

कोर्ट ने क्यों मानी सख्ती जरूरी

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने आदेश में साफ कहा कि बार बार रियायत मांगने के बाद भी आदेशों का पालन नहीं किया गया. कोर्ट ने कहा कि जब खुद याचिकाकर्ता ने अपनी देनदारी स्वीकार की और भुगतान का वादा किया, तो फिर आदेशों की अनदेखी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जा सकती.

हाई कोर्ट ने साफ किया कि राजपाल यादव को पहले दी गई राहत को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है. अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त संदेश देना जरूरी है ताकि न्याय प्रणाली में लोगों का भरोसा बना रहे. इसी आधार पर सरेंडर का आदेश जारी किया गया.