यूट्यूबर पायल गेमिंग से जुड़े डीपफेक मामला, महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने आरोपी को किया गिफ्तार
जानी मानी यूट्यूबर पायल गेमिंग से जुड़ा कथित डीपफेक वीडियो वायरल होने के बाद महाराष्ट्र साइबर ने सख्त कदम उठाया है. एजेंसी ने वीडियो अपलोड और साझा करने वाले कई युवाओं को हिरासत में लेकर उनसे सार्वजनिक माफी मंगवाई है.
मुंबई: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि उसमें लोकप्रिय यूट्यूबर पायल गेमिंग दिखाई दे रही हैं. यह वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर हड़कंप मच गया और देखते ही देखते कई मंचों पर इसे साझा किया जाने लगा. बाद में यह सामने आया कि यह वीडियो असली नहीं बल्कि डीपफेक तकनीक की मदद से तैयार किया गया था.
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र साइबर ने तुरंत जांच शुरू की. रविवार को एजेंसी ने जानकारी दी कि इस मामले में शामिल कई युवाओं को हिरासत में लिया गया है और उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं. साथ ही इन लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी भी मंगवाई गई है.
आपत्तिजनक सामग्री फैलाने वालों की पहचान
महाराष्ट्र साइबर ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि जिन लोगों ने इस आपत्तिजनक सामग्री को सबसे पहले अपलोड और साझा किया था, उनकी पहचान कर ली गई है. एजेंसी के अनुसार जल्द ही इस मामले में शामिल अन्य लोगों को भी पकड़ा जाएगा. जांच एजेंसी ने साफ कहा कि तकनीक के गलत इस्तेमाल को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
सार्वजनिक माफी के वीडियो जारी
इस कार्रवाई के दौरान महाराष्ट्र साइबर ने कुछ आरोपियों के माफी मांगते हुए वीडियो भी साझा किए. इनमें से एक वीडियो में आरोपी अभिषेक जादौन ने स्वीकार किया कि उसने बिना किसी पुष्टि के अपने सामाजिक मंच पर डीपफेक वीडियो का लिंक साझा किया था. उसने माना कि उसके इस कदम से पायल गेमिंग की छवि को नुकसान पहुंचा.
आरोपी ने अपने बयान में कहा कि महाराष्ट्र साइबर की ओर से उसे काउंसलिंग दी गई और उसे यह समझाया गया कि इस तरह की हरकतें किसी की जिंदगी और सम्मान को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं. उसने अपने व्यवहार पर पछतावा जताया और भविष्य में ऐसा न करने का वादा किया.
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
महाराष्ट्र साइबर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई यहीं खत्म नहीं होगी. एजेंसी के अनुसार इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी. यह कदम समाज में एक मजबूत संदेश देने के लिए उठाया गया है.
इस पूरे मामले ने एक बार फिर डीपफेक तकनीक के खतरे को उजागर कर दिया है. आज के दौर में किसी की तस्वीर या वीडियो का गलत इस्तेमाल कर फर्जी सामग्री बनाना आसान हो गया है. इसका सबसे बड़ा नुकसान उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा और मानसिक स्थिति पर पड़ता है, जिसके नाम पर यह सामग्री फैलाई जाती है.