मुंबई: हिंदी सिनेमा में जब भी किसी फिल्म में गालियों या हिंसा का इस्तेमाल होता है तो उस पर सवाल उठने लगते हैं. समाज का एक वर्ग इसे गलत मानता है तो दूसरा इसे कहानी की जरूरत बताता है. हाल ही में फिल्म ओ रोमियो के ट्रेलर के बाद यही बहस फिर से तेज हो गई. खासतौर पर दिग्गज एक्ट्रेस फरीदा जलाल के एक डायलॉग ने लोगों का ध्यान खींचा.
फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान निर्देशक विशाल भारद्वाज ने गालियों और सेंसरशिप पर बेबाक राय रखी. उन्होंने कहा कि फिल्मों में हर बार गालियों पर बीप लगाना जरूरी नहीं होना चाहिए. उनके मुताबिक समाज का रवैया दोहरा है. जो बातें लोग असल जिंदगी में नजरअंदाज कर देते हैं वही चीजें पर्दे पर दिखते ही विवाद बन जाती हैं.
विशाल भारद्वाज का मानना है कि सिनेमा समाज से अलग नहीं होता. फिल्मों में जो भाषा और हिंसा दिखाई जाती है वह हमारे आसपास की सच्चाई से ही आती है. अगर आज फिल्मों में हिंसा दिख रही है तो इसकी वजह यह है कि समाज में भी हिंसा बढ़ रही है. सिनेमा सिर्फ उसी सच को सामने लाता है.
डायरेक्टर ने गालियों के इस्तेमाल पर एक दिलचस्प नजरिया भी पेश किया. उन्होंने कहा कि अगर स्लैंग और गालियों का इस्तेमाल सही संदर्भ में किया जाए तो उनमें भी एक तरह की कला होती है. ठीक वैसे ही जैसे कविता में शब्दों का चुनाव किया जाता है. उनके अनुसार भाषा को पूरी तरह से सेंसर करना कहानी के असर को कमजोर कर देता है.
ओ रोमियो के टीजर में दिग्गज एक्ट्रेस फरीदा जलाल को गाली देते हुए दिखाया गया है. यह सीन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. दर्शकों को हैरानी इस बात की हुई कि एक सीनियर अभिनेत्री इस तरह के डायलॉग बोलती नजर आईं.
विशाल भारद्वाज ने बताया कि जब वे फरीदा जलाल के पास फिल्म का ऑफर लेकर गए थे तो उन्हें पहले झिझक हो रही थी. किरदार में उन्हें अपने ऑन स्क्रीन पोते को कड़ी भाषा में बात करनी थी. जब निर्देशक ने उन्हें किरदार की जरूरत समझाई तो फरीदा जलाल ने इसे सहजता से स्वीकार कर लिया. उन्होंने पूरे मन से वह सीन किया जो आज चर्चा में है.