Nana Patekar Life Story: कभी सड़क पर पेंट की जेब्रा क्रॉसिंग, फिर पर्दे पर मचाई दहाड़; जानें कैसी थी नाना पाटेकर की जिंदगी

नाना पाटेकर का जीवन सिर्फ फिल्मों में मिली सफलता की कहानी नहीं था, बल्कि संघर्ष, निजी दर्द और अभिनय के प्रति जुनून से भरा सफर था.

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Reepu Kumari

Nana Patekar Life Story: नाना पाटेकर का नाम आते ही जेहन में एक ऐसा अभिनेता उभरता है, जिसकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और पर्दे पर मौजूदगी अलग ही असर छोड़ती थी. 75 साल की उम्र में अब उनके निधन की खबर ने उनके चाहने वालों को गहरे दुख में डाल दिया है. गोवा में घर पर बेहोश मिलने के बाद उन्हें दोना पावला स्थित मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया. उनके जाने से बॉलीवुड में शोक की लहर है.

पर्दे पर गरजने वाले नाना असल जिंदगी में बेहद सादे और निजी इंसान थे. उनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था. एक जनवरी 1951 को रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में एक मराठी परिवार में जन्मे नाना को अभिनय की पहली सीख अपने पिता से मिली, जिन्हें नाटकों का गहरा शौक था. बचपन में थिएटर देखते हुए जो बीज पड़ा, वही आगे चलकर विशाल पेड़ बना. कम उम्र में पिता को दिल के दौरे से खोने का गम उन्हें भीतर तक बदल गया.

पोस्टर रंगने वाला लड़का

फिल्मों में आने से पहले नाना स्केच आर्टिस्ट थे. वे सिर्फ 13 साल की उम्र में काम करने लगे थे. उन्होंने अप्लाइड आर्ट में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और फिल्मों के पोस्टर रंगे, जिसके बदले महीने के महज 35 रुपये मिलते थे. हालात ऐसे थे कि शुरुआती दिनों में उन्होंने सड़क पर जेब्रा क्रॉसिंग तक पेंट की.


आठ साल लंबा इंतजार

साल 1978 में फिल्म 'गमन' से करियर शुरू हुआ, लेकिन दर्शकों के दिलों में जगह नहीं बन पाई. करीब आठ साल उन्होंने इंडस्ट्री में संघर्ष किया. इस दौरान 'भालू' और 'शीला' जैसी फिल्मों में काम किया. असली मोड़ 1984 में 'आज की आवाज' से आया, जिसमें राज बब्बर के साथ उन्हें नई पहचान मिली.

कैमरे के पीछे का नाना

अभिनय में नाम कमाने के बाद 1991 में उन्होंने निर्देशन की कुर्सी संभाली. दिलचस्प यह रहा कि उन्होंने माधुरी दीक्षित को बिना ग्लैमर वाला किरदार देकर दर्शकों के सामने बिल्कुल नए रूप में पेश किया. अभिनय के लिए उन्हें चार बार फिल्मफेयर और तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिले.

वर्दी का जुनून

नाना को 'एंग्री यंग मैन' के साथ 'रियल आर्मी मैन' भी कहा गया. उन्होंने 'प्रहार' का निर्देशन किया और इसके लिए पूरे तीन साल सेना अधिकारी की ट्रेनिंग ली. किरदार निभाने के लिए इतनी तपस्या कम ही कलाकार करते हैं. शायद इसीलिए पर्दे पर उनकी वर्दी नकली नहीं, जीती हुई लगती थी.

एक करोड़ की फीस, एक कमरे की जिंदगी

नाना पहले बॉलीवुड अभिनेता थे जिन्होंने निर्देशकों से एक करोड़ रुपये मांगे, और निर्माता मान भी गए. फिर भी बताया जाता है कि वे मुंबई के अपने 1 BHK फ्लैट में ही रहते रहे. शोहरत और दौलत के बीच भी उनकी सादगी हैरान करती थी.

वो जख्म, जो कभी नहीं भरे

नीलकांति से उनकी शादी लंबे समय तक सुखद नहीं रही. पहले बेटे को कम उम्र में खोना उनकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक दौर माना जाता है, जिसके बाद वे और अंतर्मुखी हो गए. मनीषा कोइराला के साथ रिश्ते की चर्चाएं भी रहीं, जिनमें सूत्रों के अनुसार गुस्से के कारण दरार आई. 2018 में तनुश्री दत्ता ने आरोप लगाए, सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग हुई और उन्हें एक फिल्म छोड़नी पड़ी.