मुंबई: विपुल अमृतलाल शाह प्रोड्यूस की गई विवादास्पद फिल्म द केरल स्टोरी 2: गोस बियॉन्ड को अब पाइरेसी से बड़ा खतरा मंडरा रहा था, लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स और केबल टीवी ऑपरेटर्स को फिल्म की अवैध ब्रॉडकास्ट करने से रोक दिया है. यह आदेश 3 मार्च 2026 को जारी हुआ, जब फिल्म थिएटर्स में रिलीज हो चुकी थी.
जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति ने प्रोड्यूसर सनशाइन पिक्चर्स लिमिटेड की दो याचिकाओं पर अंतरिम आदेश दिया. प्रोड्यूसर ने कोर्ट को बताया कि फिल्म की रिलीज से पहले ही कॉपीराइट उल्लंघन का खतरा है, क्योंकि कुछ लोग इसे अवैध तरीके से ब्रॉडकास्ट कर सकते हैं. कोर्ट ने CBFC सर्टिफिकेट को मालिकाना हक का सबूत मानते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में अगर रोक न लगाई जाए तो अपूरणीय नुकसान हो सकता है.
कोर्ट ने कहा- 'ऐसे मामलों में अवैध ब्रॉडकास्ट को शुरू से रोकना जरूरी है, वरना अपूरणीय क्षति होती है.' हालांकि कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि यह आदेश कुछ रिस्पॉन्डेंट्स के वैध बिजनेस इंटरेस्ट को प्रभावित कर सकता है, इसलिए प्रोड्यूसर को इंडेम्निटी देने का निर्देश दिया. आदेश के तहत एड-इंतरिम इंजंक्शन 23 मार्च 2026 तक लागू रहेगा. इस दौरान नोटिस जारी किया गया है और केस की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी.
प्रोड्यूसर को CPC के ऑर्डर XXXIX रूल 3 का पालन करना होगा. फिल्म कमाख्या नारायण सिंह द्वारा निर्देशित है और यह तीन युवतियों की कहानी बताती है, जो धोखे से शादी और जबरन धर्मांतरण का शिकार होती हैं. यह पहली फिल्म 'द केरल स्टोरी' का सीक्वल है, जो 2023 में काफी विवादास्पद रही थी. रिलीज से पहले फिल्म को कई कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. केरल हाई कोर्ट ने 26 फरवरी 2026 को रिलीज पर अंतरिम स्टे लगा दिया था, जिससे फिल्म को थिएटर्स से हटाना पड़ा. लेकिन डिवीजन बेंच ने बाद में स्टे हटा दिया, जिससे फिल्म 27 या 28 फरवरी 2026 को रिलीज हो सकी.
केरल के राजनीतिक नेताओं ने इसे प्रोपगैंडा करार दिया था. प्रोड्यूसर विपुल शाह ने कहा है कि फिल्म किसी राज्य को बदनाम करने के लिए नहीं बनी, बल्कि जबरन कन्वर्जन जैसे मुद्दे पर रोशनी डालती है. कोर्ट का यह फैसला फिल्म को पाइरेसी से बचाने में मददगार साबित होगा, खासकर रिलीज के शुरुआती दिनों में जब डिजिटल लीक का खतरा ज्यादा होता है. यह कदम बॉलीवुड में पाइरेसी के खिलाफ सख्ती का संकेत है. अब देखना होगा कि 23 मार्च की सुनवाई में क्या फैसला आता है.