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थलापति विजय की फिल्म लीक करना पड़ा भारी, पुलिस ने शुरू की बड़ी कार्रवाई; छह लोग गिरफ्तार

जना नायकन फिल्म के लीक होने के बाद साइबर क्राइम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार किया है. मेकर्स ने साफ चेतावनी दी है कि लीक कंटेंट शेयर करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी.

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Edited By: Babli Rautela
थलापति विजय की फिल्म लीक करना पड़ा भारी, पुलिस ने शुरू की बड़ी कार्रवाई; छह लोग गिरफ्तार
Courtesy: X

मुंबई: जना नायकन के लीक होने की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया है. रिलीज से पहले ही फिल्म के कुछ दृश्य इंटरनेट पर सामने आने के बाद मेकर्स ने तुरंत सख्त कदम उठाए और अब इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. साइबर क्राइम विभाग ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे साफ संकेत मिल रहा है कि पायरेसी को लेकर अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी.

तमिलनाडु पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए जांच शुरू की और कुछ ही घंटों में छह आरोपियों को पकड़ लिया. यह कार्रवाई उस समय हुई जब फिल्म के लीक हुए वीडियो क्लिप सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैलने लगे थे. अधिकारियों का कहना है कि जो भी व्यक्ति इस कंटेंट को शेयर करेगा, उसे ट्रैक करके उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

मेकर्स की सख्त चेतावनी

फिल्म के कानूनी सलाहकार विजयन सुब्रमण्यम ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी रूप में लीक कंटेंट को डाउनलोड, शेयर या स्टोर करना अपराध माना जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म पर भारी बजट खर्च हुआ है और इसका थिएटर, ओटीटी और सैटेलाइट स्तर पर बड़ा महत्व है. ऐसे में पायरेसी से न सिर्फ नुकसान होता है बल्कि पूरी इंडस्ट्री पर इसका असर पड़ता है.

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रोडक्शन टीम ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. प्रोडक्शन कंट्रोलर आर उदयकुमार ने अधिकारियों से अनुरोध किया कि लीक हुए फुटेज को तुरंत हटाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. शिकायत में यह भी कहा गया कि फिल्म के अनरिलीज्ड सीन को बिना अनुमति के ऑनलाइन फैलाया जा रहा है, जो एक गंभीर अपराध है.

रिपोर्ट्स के अनुसार इस पायरेसी नेटवर्क में कई लोगों की संलिप्तता सामने आई है और करीब 21 संदिग्धों की पहचान की गई है. जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं ताकि यह समझा जा सके कि लीक कहां से शुरू हुआ और किन लोगों ने इसे आगे फैलाया. इसके लिए साइबर फोरेंसिक टीमों को भी लगाया गया है, जो डिजिटल सबूतों की जांच कर रही हैं.