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'तेरे इश्क में' के सामने ढही 'गुस्ताख इश्क', ओपनिंग डे पर विजय वर्मा-फातिमा को झटका

विजय वर्मा और फातिमा सना शेख की गुस्ताख इश्क ने पहले दिन पचास लाख से कम की ओपनिंग की. पॉजिटिव रिव्यू के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धीमी रही, जबकि उसी दिन रिलीज तेरे इश्क में ने सोलह करोड़ कमाए.

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Edited By: Babli Rautela
'तेरे इश्क में' के सामने ढही 'गुस्ताख इश्क', ओपनिंग डे पर विजय वर्मा-फातिमा को झटका
Courtesy: X

विजय वर्मा और फातिमा सना शेख स्टारर गुस्ताख इश्क शुक्रवार 28 नवंबर को थिएटर में रिलीज हुई. विभु पुरी की डायरेक्टेड यह फिल्म फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के प्रोडक्शन हाउस स्टेज फाइव की पहली थिएटर रिलीज भी है. रिलीज से पहले फिल्म को सोशल मीडिया पर अच्छी प्रतिक्रियाएं मिली थीं, और गोवा में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के गाला प्रीमियर में भी इसे सराहना मिली थी. लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसका पहला दिन उम्मीद से काफी कमजोर रहा.

फिल्म इंडस्ट्री ट्रैकर सैकनिल्क के अनुसार गुस्ताख इश्क ने अपने पहले दिन केवल पचास लाख रुपए कमाए. हिंदी में कुल ऑक्यूपेंसी महज आठ दशमलव इकसठ प्रतिशत रही. इसके उलट उसी दिन रिलीज हुई कृति सेनन और धनुष की फिल्म तेरे इश्क में ने सोलह करोड़ की ओपनिंग कर ली. यह इस साल की दूसरी सबसे बड़ी रोमांटिक ओपनिंग थी.

गुस्ताख इश्क की कहानी

गुस्ताख इश्क की कहानी नब्बे के दशक में सेट है. इसमें तीन मुख्य किरदार हैं नवाजुद्दीन सैफुद्दीन यानी विजय वर्मा, मन्नत यानी फातिमा सना शेख और अजीज बेग यानी नसीरुद्दीन शाह. फिल्म इन तीनों के बीच बने रिश्तों, संघर्षों और भावनाओं के इर्द गिर्द घूमती है. यह फिल्म फेस्टिवल स्क्रीनिंग के बाद कई दर्शकों के बीच चर्चा में आई थी. लोग इसकी परफॉर्मेंस और सिनेमैटिक ट्रीटमेंट की तारीफ कर रहे थे. लेकिन दर्शकों की सराहना थिएटर पर भीड़ में तब्दील नहीं हो सकी.

अभिनय ही बना फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

गुस्ताख इश्क के बारे में सबसे ज्यादा तारीफ नसीरुद्दीन शाह को मिल रही है. एक रिव्यू में लिखा गया, यह फिल्म एक्टिंग में एक मास्टरक्लास है. खुद मास्टर की. सिर्फ और सिर्फ नसीरुद्दीन शाह की. वह सेंट्रल कैरेक्टर नहीं हैं लेकिन जिस तरह उन्होंने फिल्म को संभाला है वह सिर्फ उनके कद का एक्टर ही कर सकता है.

विजय वर्मा की परफॉर्मेंस को भी सराहा गया है. रिव्यू के अनुसार कुछ जगहों पर वह अपने किरदार के साथ संघर्ष करते हुए दिखते हैं लेकिन समग्र रूप से वह कैरेक्टर को भटकने नहीं देते.

फातिमा सना शेख ने भी एक संवेदनशील प्रदर्शन दिया जो कहानी की गति को अच्छे से आगे बढ़ाता है.