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India Daily

Emergency movie review: कंगना के 'इंदिरा अवतार' ने लोगों का दिल जीता, लेकिन लोगों को नहीं पंसद आई ये बात

फिल्म ‘इमरजेंसी’ में कंगना रनौत 1929 से 1984 तक की इंदिरा गांधी की जीवन यात्रा को समेटने की कोशिश इस फिल्म को एक क्रैश कोर्स की तरह बनाती है, जो उनकी असाधारण क्षमता और कमजोरियों दोनों को संतुलित रूप में सामने लाती है.

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Edited By: Babli Rautela
Emergency movie review: कंगना के 'इंदिरा अवतार' ने लोगों का दिल जीता, लेकिन लोगों को नहीं पंसद आई ये बात
Courtesy: Social Media

Emergency Review: कंगना रनौत की फिल्म ‘इमरजेंसी’ महज एक राजनीतिक घटना का वर्णन नहीं, बल्कि इंदिरा गांधी के जीवन और उनके नजरिए की पूरी एक दास्तान है. यह फिल्म न तो एकतरफा आलोचना है और न ही चापलूसी. 1929 से 1984 तक की इंदिरा गांधी की जीवन यात्रा को समेटने की कोशिश इस फिल्म को एक क्रैश कोर्स की तरह बनाती है, जो उनकी असाधारण क्षमता और कमजोरियों दोनों को संतुलित रूप में सामने लाती है.

इंदिरा के इतिहास के पन्नें

फिल्म की शुरुआत इंदिरा गांधी के बचपन से होती है, जहां 12 साल की ‘इंदु’ अपने दादा से फरियाद करती है. कहानी तेजी से आगे बढ़ती है और 1975 में लगाए गए आपातकाल के साथ यह अपने चरम पर पहुंचती है. इस फिल्म में 1975 का आपातकाल दिखाया गया है. फिल्म का मेन फोकस उस समय की घटनाओं और इंदिरा गांधी के फैसलों पर है. इसके अलावा इसमें बांग्लादेश की मुक्ति पर भी जोर दिया गया है. पड़ोसी देश में बदलाव के दौर और उसके भारत पर प्रभाव को भी संवेदनशीलता के साथ पेश किया गया है.

फिल्म इंदिरा और उनके बेटे संजय के बीच के जटिल रिश्ते को गहराई से दिखाती है. कई ऐतिहासिक घटनाओं, जैसे इमरजेंसी, विपक्ष का रोल और आखिर में इंदिरा की हत्या, को इतनी तेज रफ्तार से प्रस्तुत किया गया है कि दर्शक हर पल बांधे रहते हैं.

इमरजेंसी में कंगना का करिश्मा 

फिल्म को कंगना ने डायरेक्ट किया है और वही इंदिरा गांधी के किरदार को परदे पर पूरी प्रामाणिकता और आत्मविश्वास के साथ निभाती दिखाई दे रही है. उनका मेकअप, बॉडी लैंग्वेज, और डायलॉग हर चीज इतनी कमाल की है कि हर कोई देखकर बस मंत्रमुग्ध हो गया. विशाक ने संजय गांधी के आक्रामक और भावनात्मक दोनों पहलुओं को सटीकता से उकेरा है. दिवंगत एक्टर का यह किरदार उनके सबसे यादगार प्रदर्शन में गिना जाएगा. हालांकि जेपी नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी के किरदार में अनुपम खेर और श्रेयस तलपड़े पूरी तरह न्याय नहीं कर सके.

कंगना की बेजोड़ मेहनत

कंगना ने फिल्म में बतौर लेखक, डायरेक्टर और मेन एक्ट्रेस, तीनों कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है. कहानी में इंदिरा गांधी के जीवन के लगभग 25 सालों को समेटने की कोशिश में फिल्म कभी-कभी थोड़ी तेजी से आगे बढ़ती है. डायरेक्शन की बात करें तो कंगना ने बेहद संवेदनशील और संतुलित डायरेक्ट किया है, जो इमरजेंसी जैसे विवादास्पद विषय को प्रभावशाली तरीके से दर्शाता है. फिल्म का हर सीन वास्तविकता के करीब लगता है. फिल्म के प्रोस्थेटिक्स और मेकअप शानदार हैं. कंगना पूरी तरह इंदिरा गांधी के रूप में ढलती नजर आती हैं.

क्या खास बनाती है फिल्म ‘इमरजेंसी’ को?

  1. निष्पक्ष नजरिया: फिल्म न तो इंदिरा गांधी की अतिशय तारीफ करती है, न ही उनकी कठोर आलोचना.
  2. इतिहास की जीवंतता: घटनाओं का चित्रण इतना सजीव है कि दर्शक उस समय का अनुभव महसूस कर सकते हैं.
  3. कंगना का प्रदर्शन: उनका अभिनय और उनका डायरेक्शन दोनों ही फिल्म को यादगार बनाते हैं.

रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5)
अगर आप इतिहास और राजनीति में रुचि रखते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए जरूर है.