शाहरुख खान और रानी मुखर्जी को छोड़िए इस बाल कलाकर ने अपनी दमदार एक्टिंग से जीता राष्ट्रीय पुरस्कार
71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में इस बार बड़े सितारों के साथ बाल कलाकारों ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं. 5 चाइल्ड आर्टिस्ट को बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का सम्मान मिला, जिसमें मराठी फिल्मों नाल 2 और जिप्सी के साथ तेलुगु फिल्म गांधी तथा चेट्टू के कलाकार शामिल रहे.
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का मंच हमेशा से भारतीय सिनेमा की विविधता और प्रतिभा का आईना रहा है. लेकिन इस बार यह मंच खास रहा क्योंकि 71वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में छोटे कलाकारों की बड़ी कामयाबियों ने सबका दिल जीत लिया. बाल कलाकारों की मेहनत और कला को जिस तरह सराहा गया, उसने यह साबित किया कि सिनेमा का भविष्य इन नई पीढ़ी के चेहरों में छिपा है.
71वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में पांच बाल कलाकारों को सम्मानित किया गया. मराठी फिल्म नाल 2 के लिए त्रिशा थोसर को बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का नेशनल अवॉर्ड मिला है. साथ ही श्रीनिवास पोकले और भार्गव जगताप ने बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का अवॉर्ड जीता. दिलचस्प बात यह रही कि श्रीनिवास पोकले को यह पुरस्कार दूसरी बार मिला, जो उनकी प्रतिभा और मेहनत का बड़ा प्रमाण है. वहीं कबीर खंडारे को मराठी फिल्म जिप्सी के लिए सम्मान मिला. इसके अलावा, तेलुगु फिल्म गांधी तथा चेट्टू की सुकृति वेणी बंद्रेड्डी भी बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट बनीं.
बड़े सितारों के बीच बच्चों का जलवा
यह समारोह सिर्फ बच्चों के लिए ही खास नहीं था. यहां बड़े सितारों को भी सम्मान मिला. शाहरुख खान को उनकी ब्लॉकबस्टर जवान के लिए पहला नेशनल अवॉर्ड बेस्ट एक्टर कैटेगरी में दिया गया. उनके साथ विक्रांत मैसी को 12वीं फेल के लिए बेस्ट एक्टर चुना गया. रानी मुखर्जी ने मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब जीता. मोहनलाल को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया, जिसे उन्होंने अपने करियर का सबसे मैजिकल पल बताया.
नई कहानियों का नया दौर
71वें नेशनल अवॉर्ड्स में इस बार ऐसी फिल्मों को भी सम्मान मिला जो सामाजिक और राष्ट्रीय मूल्यों को आगे बढ़ाती हैं. सैम बहादुर को इस श्रेणी में अवॉर्ड मिला, जबकि 12वीं फेल को बेस्ट फीचर फिल्म का खिताब दिया गया. रॉकी और रानी की प्रेम कहानी ने बेस्ट पॉपुलर फिल्म का अवॉर्ड जीता. साथ ही तकनीकी कैटेगरी में भी कई फिल्मों को सराहा गया. एनिमल को बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर और साउंड डिजाइन के लिए, जबकि सैम बहादुर को बेस्ट मेकअप और कॉस्ट्यूम डिजाइन के लिए पुरस्कृत किया गया.
सिनेमा का भविष्य बच्चों के हाथों में
बच्चों की जीत ने इस साल के नेशनल अवॉर्ड्स को खास बना दिया यह सिर्फ पुरस्कार नहीं, बल्कि इस बात का संदेश भी है कि आने वाले समय में भारतीय सिनेमा को दिशा देने वाले ये ही नन्हें कलाकार होंगे. उनकी मेहनत और अभिनय क्षमता ने यह जता दिया कि बड़े परदे पर नई ऊर्जा और ताजगी का दौर शुरू हो चुका है.
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