मुंबई: अगर आप बॉलीवुड फिल्में देखने के शौकीन हैं, तो आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी. ज्यादातर बड़ी हिंदी फिल्में शुक्रवार को ही सिनेमाघरों में रिलीज होती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शुक्रवार को ही फिल्मों की रिलीज के लिए क्यों चुना जाता है. क्या इसकी वजह सिर्फ वीकेंड है या इसके पीछे कोई पुरानी परंपरा और बिजनेस रणनीति भी है. दरअसल, शुक्रवार को फिल्म रिलीज करने के पीछे कई वजहें हैं. इनमें वीकेंड का फायदा, कमाई की रणनीति, धार्मिक मान्यताएं और फिल्म इंडस्ट्री की पुरानी परंपराएं शामिल हैं.
शुक्रवार को फिल्म रिलीज करने की सबसे बड़ी वजह वीकेंड मानी जाती है. शुक्रवार को रिलीज होने के बाद फिल्म के पास शनिवार और रविवार जैसे दो बड़े दिन होते हैं. इन दिनों स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों की छुट्टी होने के कारण ज्यादा लोग परिवार और दोस्तों के साथ फिल्म देखने पहुंचते हैं. अगर फिल्म को पहले दिन दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल जाता है, तो शनिवार और रविवार की कमाई में तेजी आ सकती है. यही वजह है कि निर्माता शुक्रवार को रिलीज को काफी सुरक्षित विकल्प मानते हैं.
भारत में शुक्रवार को फिल्म रिलीज करने की परंपरा अचानक शुरू नहीं हुई थी. हॉलीवुड की चर्चित फिल्म गॉन विद द विंड शुक्रवार को रिलीज हुई थी और इसकी सफलता ने फिल्म कारोबार से जुड़े लोगों का ध्यान आकर्षित किया. इसके बाद भारत में भी शुक्रवार को रिलीज का चलन धीरे धीरे बढ़ा. साल 1960 में रिलीज हुई मुगल ए आजम ने इस ट्रेंड को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई. फिल्म 5 अगस्त 1960 को रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की. इसके बाद शुक्रवार को फिल्म रिलीज करना बॉलीवुड में एक तरह की परंपरा बन गया.
फिल्म रिलीज के पीछे सिर्फ कारोबार नहीं बल्कि धार्मिक मान्यताओं का भी असर रहा है. हिंदू मान्यता में शुक्रवार का संबंध देवी लक्ष्मी से माना जाता है. लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है. इसी वजह से पुराने समय में कई निर्माता शुक्रवार को फिल्म रिलीज करना शुभ मानते थे. माना जाता था कि इस दिन किसी नए काम की शुरुआत करने से सफलता और आर्थिक लाभ मिल सकता है. फिल्म निर्माण से जुड़ी कुछ परंपराओं में शुक्रवार को पहला शॉट लेने की बात भी सामने आती रही है.
शुक्रवार को फिल्मों की रिलीज से जुड़ी एक वजह पुराने समय की कामकाजी व्यवस्था भी रही है. पहले कई जगहों पर कर्मचारियों को शुक्रवार को आधे दिन की छुट्टी मिलती थी. ऐसे में लोग काम खत्म करने के बाद परिवार के साथ फिल्म देखने जा सकते थे. उस समय मनोरंजन के साधन आज की तरह ज्यादा नहीं थे. न इंटरनेट था और न ही ओटीटी प्लेटफॉर्म. ऐसे में सिनेमाघर लोगों के मनोरंजन का एक बड़ा माध्यम हुआ करते थे. इस वजह से शुक्रवार की शाम से शुरू होने वाला फिल्म देखने का सिलसिला पूरे वीकेंड तक चलता था.
फिल्म रिलीज का फैसला केवल दर्शकों की सुविधा देखकर नहीं किया जाता. इसमें थिएटर और स्क्रीनिंग से जुड़े आर्थिक पहलू भी शामिल होते हैं. निर्माता चाहते हैं कि फिल्म को रिलीज के बाद लगातार दर्शक मिलें. शुक्रवार से शुरुआत होने पर फिल्म को शुरुआती तीन दिनों में अच्छा कलेक्शन हासिल करने का मौका मिलता है. इसके बाद सोमवार से फिल्म की असली पकड़ का अंदाजा लगाया जाता है. इसी वजह से बॉक्स ऑफिस पर शुक्रवार, शनिवार और रविवार को फिल्म के प्रदर्शन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.