नई दिल्ली: सड़क पर गड्ढा दिखे तो आमतौर पर लोग खराब सड़क, वाहन को हुए नुकसान और प्रशासन से शिकायत तक ही सीमित रह जाते हैं. लेकिन बेंगलुरु के इंजीनियर गौरव सेन ने इसी रोजमर्रा की परेशानी को तकनीक से हल करने की कोशिश की. उन्होंने ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो कार चलाते समय सड़क के गड्ढों को पहचानता है, उनकी सही लोकेशन दर्ज करता है और सरकारी रिकॉर्ड खंगालकर यह पता लगाने में मदद करता है कि सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी किस ठेकेदार की है.
गौरव सेन की कार में डैशकैम के साथ GPS और एक्सेलेरोमीटर लगाया गया है. कार के चलते समय ये उपकरण सड़क की तस्वीरें और जरूरी आंकड़े जुटाते हैं. इसके बाद AI विजन मॉडल वीडियो फुटेज को स्कैन करके अलग-अलग आकार के गड्ढों की पहचान करता है. सिस्टम उन गड्ढों को भी पहचानने की कोशिश करता है, जिन्हें दूर से देखने पर स्पीड ब्रेकर समझ लिया जाता है.
गड्ढे की पहचान के बाद अगली चुनौती यह पता करना थी कि उसकी मरम्मत कौन करेगा. इसके लिए सेन ने ऐप को करीब 2,900 सरकारी ठेकों के रिकॉर्ड से जोड़ा. सिस्टम सड़क के संबंधित हिस्से का ठेका खोजकर जिम्मेदार ठेकेदार की जानकारी निकाल सकता है. सेन के मुताबिक, सड़क वारंटी में होने पर यह जानकारी खास तौर पर उपयोगी हो सकती है, क्योंकि ठेकेदार को अतिरिक्त सरकारी खर्च के बिना खराबी ठीक करनी पड़ सकती है.
यह सिस्टम केवल गड्ढे की पहचान तक सीमित नहीं है. सेन के मुताबिक, ऐप करीब चार सेकंड में एक व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार कर सकता है. इसमें गड्ढे की तस्वीर, उसकी सटीक लोकेशन, टेंडर नंबर और संबंधित अधिकारी की जानकारी शामिल होती है. यानी सड़क की खराब हालत को लेकर की जाने वाली शिकायत केवल मौखिक आरोप नहीं रहती, बल्कि उसके साथ तस्वीर और सरकारी रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध हो जाती है.
सेन ने अपने रोजाना के सफर के दौरान इस सिस्टम का परीक्षण भी किया. एक यात्रा में ऐप ने रास्ते में 12 गड्ढों की पहचान की. इनकी जानकारी भविष्य में संबंधित नागरिक एजेंसियों के सामने शिकायत दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. इस प्रयोग का वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया गया, जिसे बाद में X पर भी लोगों ने देखा. सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे ऐसी समस्या के लिए उपयोगी प्रयोग बताया, जिसका सामना देशभर के वाहन चालक करते हैं.
गौरव सेन का प्रयोग यह दिखाता है कि AI का इस्तेमाल केवल कंटेंट या सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित नहीं है. सही डेटा के साथ इसका उपयोग स्थानीय समस्याओं को दर्ज करने और जवाबदेही तय करने में भी किया जा सकता है. अगर ऐसी तकनीक को नगर निकाय और सरकारी एजेंसियां बड़े स्तर पर अपनाएं, तो खराब सड़कों की पहचान और मरम्मत की प्रक्रिया तेज हो सकती है. फिलहाल सेन का यह प्रयोग एक नागरिक समस्या को डेटा आधारित समाधान में बदलने की कोशिश है.