रामगढ़ में BSP ने मामूली अंतर से दर्ज की 'बड़ी जीत', एक बार फिर चर्चा में मायावती की 'सोशल इंजीनियरिंग'
बिहार चुनाव में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ने वाली बहुजन समाज पार्टी ने एक सीट पर जीत दर्ज की है. बसपा प्रत्याशी ने ये जीत तब दर्ज की है, जब पुरे राज्य में NDA की प्रचंड लहर देखने को मिली. इस जीत से न सिर्फ BSP कार्यकर्ता, बल्कि मायावती को भी उम्मीद की किरणें नजर आएंगी.
रामगढ़: बिहार विधानसभा चुनाव में कैमूर जिले की रामगढ़ सीट पर बसपा की अप्रत्याशित जीत ने पूरे राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. यह सीट आमतौर पर एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर के लिए जानी जाती थी, लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई. पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने यहां ऐसा प्रदर्शन किया कि बड़े-बड़े राजनीतिक दल भी हैरान रह गए. मायावती की पार्टी का यह नतीजा बिहार की राजनीतिक धारा में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
बसपा उम्मीदवार सतीश कुमार सिंह यादव की जीत सिर्फ एक सीट का चुनाव परिणाम नहीं, बल्कि उन सामाजिक समुदायों के बदलते राजनीतिक रुझान का प्रतीक है, जो अब पारंपरिक राजनीति से हटकर नए विकल्प की तलाश कर रहे हैं. सतीश यादव को यादव, ओबीसी और दलित मतदाताओं का मजबूत समर्थन मिला और यही एकजुट वोटबैंक बसपा के लिए निर्णायक साबित हुआ.
जीत का अंतर मामूली, लेकिन परिणाम ऐतिहासिक
जीत का अंतर बेहद मामूली रहा, लेकिन परिणाम ऐतिहासिक था. सतीश कुमार सिंह यादव को कुल 72,689 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार अशोक कुमार सिंह 72,659 वोट पाकर सिर्फ 30 वोटों से पीछे रह गए. यह जीत भले ही कम अंतर से आई हो, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा है. आरजेडी उम्मीदवार अजित कुमार 41,480 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.
क्या तीसरे विकल्प की तलाश में हैं राज्य के मतदाता?
मायावती लंबे समय से ‘बहुजन एकता', यानी दलित, पिछड़े और हाशिये पर रहने वाले वर्गों को एक मंच पर लाने की बात करती रही हैं. रामगढ़ में मिली सफलता ने इस विचारधारा को बिहार में नई ऊर्जा दी है. यह नतीजा साफ दिखाता है कि राज्य के मतदाता अब केवल दो गठबंधनों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि तीसरे राजनीतिक विकल्प को भी पूरी गंभीरता से देख रहे हैं.
बसपा की जीत के क्या हैं राजनीतिक मायनें?
बसपा कई वर्षों से कैमूर, रोहतास, भभुआ जैसे यूपी सीमा से जुड़े जिलों में संगठन मजबूत करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बड़े चुनावी नतीजे नहीं मिल पा रहे थे. रामगढ़ की जीत बसपा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है. इस जीत ने स्थानीय कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है और उन्हें विश्वास दिलाया है कि बसपा बिहार की राजनीति में एक वास्तविक और प्रभावी विकल्प बन सकती है, न कि सिर्फ पड़ोसी राज्य की पार्टी.
इस जीत का एक और महत्वपूर्ण संदेश यह है कि बिहार की राजनीति धीरे-धीरे दो-ध्रुवीय संरचना से बाहर निकल रही है. मतदाता अब एनडीए और महागठबंधन के अलावा अन्य दलों को भी मौका देना चाहते हैं. मायावती के लिए यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश में घटते जनाधार के बीच बिहार में बसपा का उभरना भविष्य की राजनीति को नई दिशा दे सकता है.