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India Daily

कर्तव्य पथ पर शौर्य का सफर, कितनी लंबी होती है गणतंत्र दिवस परेड? छात्र जरुर जानें कितनी तोपों से दी जाती है सलामी

हर साल 26 जनवरी को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर निकलने वाली गणतंत्र दिवस परेड देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक परंपराओं का भव्य प्रदर्शन होती है.

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Edited By: Reepu Kumari
कर्तव्य पथ पर शौर्य का सफर, कितनी लंबी होती है गणतंत्र दिवस परेड? छात्र जरुर जानें कितनी तोपों से दी जाती है सलामी
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: भारत में 26 जनवरी का दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की शक्ति का प्रतीक है. इस दिन पूरा देश गणतंत्र दिवस मनाता है और नई दिल्ली का कर्तव्य पथ राष्ट्रीय उत्सव का केंद्र बन जाता है. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में आयोजित परेड दुनिया भर का ध्यान आकर्षित करती है.

गणतंत्र दिवस परेड भारत की एकता और विविधता को मंच पर लाने का माध्यम है. इसमें थलसेना, नौसेना और वायुसेना की टुकड़ियां, एनसीसी कैडेट्स और विभिन्न राज्यों की झांकियां शामिल होती हैं. हर दृश्य देश की सांस्कृतिक और सैन्य ताकत को दर्शाता है और नागरिकों में देशभक्ति की भावना जगाता है.

गणतंत्र दिवस परेड का मार्ग और दूरी

गणतंत्र दिवस परेड का कुल मार्ग लगभग 8 से 9 किलोमीटर का होता है. इसकी शुरुआत राष्ट्रपति भवन के पास से होती है और यह विजय चौक तथा इंडिया गेट के आसपास के क्षेत्रों से गुजरती है. मुख्य कार्यक्रम कर्तव्य पथ पर आयोजित होता है, जहां अनुशासित कदमताल और सैन्य प्रदर्शन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं.

परेड में दिखती है भारत की सैन्य ताकत

परेड के दौरान भारतीय सेना अपने आधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन करती है. टैंक, मिसाइल सिस्टम और अन्य रक्षा साधन देश की सुरक्षा क्षमता को दर्शाते हैं. इसके साथ ही वायुसेना के लड़ाकू विमान आसमान में करतब दिखाते हैं, जो तकनीकी प्रगति और सामरिक शक्ति का प्रतीक होते हैं.

21 तोपों की सलामी का विशेष महत्व

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति के ध्वजारोहण के समय 21 तोपों की सलामी दी जाती है. यह सलामी सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक मानी जाती है. इसके लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग किया जाता है, जो पूरी तरह स्वदेशी है और भारतीय रक्षा निर्माण क्षमता को दर्शाती है.

26 जनवरी का ऐतिहासिक संदर्भ

26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और देश पूर्ण गणतंत्र बना. इसी दिन देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. तभी से यह परंपरा हर साल निभाई जाती है और यह दिन इतिहास और वर्तमान को जोड़ने का कार्य करता है.

आज के भारत में परेड का संदेश

आज गणतंत्र दिवस परेड केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है. यह आयोजन देश की एकता, अनुशासन और संप्रभुता का संदेश देता है. कर्तव्य पथ पर गूंजती तोपों की आवाज हर भारतीय के मन में गर्व और जिम्मेदारी की भावना भर देती है.