अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने की खबर के बाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. आमतौर पर ऐसी बड़ी राजनीतिक घटनाओं के बाद तेल महंगा होता है, लेकिन इस बार बाजार की प्रतिक्रिया अलग रही. निवेशकों ने माना कि इस घटना का तेल की सप्लाई पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा.
अमेरिकी बेंचमार्क कच्चा तेल 36 सेंट गिरकर 56.96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं ब्रेंट क्रूड 34 सेंट की गिरावट के साथ 60.41 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. विश्लेषकों के अनुसार, दुनिया भर में तेल की सप्लाई फिलहाल पर्याप्त है, जिससे कीमतें बीते करीब छह महीनों के निचले स्तर के आसपास बनी हुई हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला का तेल उद्योग पिछले कई सालों से प्रतिबंधों और निवेश की कमी से जूझ रहा है. वहां का मौजूदा उत्पादन करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन है. राजनीतिक बदलाव के बावजूद उत्पादन अचानक बढ़ना मुश्किल है. तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए समय और भारी निवेश की जरूरत होगी, इसलिए निकट भविष्य में वैश्विक सप्लाई पर इसका खास असर नहीं दिखता.
तेल के उलट, शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली. एशियाई बाजारों में टेक शेयरों के दम पर जोरदार उछाल आया. जापान का निक्केई सूचकांक 3 प्रतिशत चढ़कर अक्टूबर के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. दक्षिण कोरिया, ताइवान और यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी बढ़त दर्ज की गई. अमेरिकी बाजारों के संकेत भी स्थिर रहे.
भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश का रास्ता चुना. इसी कारण सोने की कीमत में 2.7 प्रतिशत और चांदी में 6.6 प्रतिशत की तेजी आई. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक शेयरों में जोखिम ले रहे हैं, लेकिन साथ ही संभावित झटकों से बचाव भी कर रहे हैं.
यह नए साल का पहला पूरा कारोबारी सप्ताह है. अब निवेशकों की नजर अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों पर है, जैसे सर्विस सेक्टर, उपभोक्ता भरोसा और रोजगार से जुड़े आंकड़े. ये आंकड़े जनवरी के अंत में होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले काफी अहम माने जा रहे हैं.
पिछले सप्ताह अमेरिकी शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुए. कुल मिलाकर निवेशकों का भरोसा बना हुआ है, लेकिन वे हर कदम सोच-समझकर उठा रहे हैं.