नई दिल्ली: अमेरिका के केंद्रीय बैंक, यानी 'यूएस फेडरल रिजर्व' ने हाल ही में ब्याज दरों में 0.25% यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है. इसके बाद वहां ब्याज दरें बढ़कर 3.75% से 4% के दायरे में आ गई हैं. पिछले तीन सालों से भी ज़्यादा समय में यह पहली बार हुआ है जब अमेरिका ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं.
अमेरिका का यह फैसला दिखने में भले ही उनके देश का लगता हो, लेकिन इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था, हमारे शेयर बाज़ार और आपकी जेब पर भी पड़ता है. मान लीजिए आपके पास 100 रुपये निवेश करने के लिए हैं. पहले भारत में निवेश करने पर आपको अच्छा मुनाफा मिल रहा था और अमेरिका में कम ब्याज मिल रहा था. इसलिए विदेशी निवेशक अपना पैसा भारत के बाज़ार में लगा रहे थे.
लेकिन अब अमेरिका ने अपने यहां ब्याज दरें बढ़ा दी हैं. साथ ही अमेरिका को निवेश के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित भी माना जाता है. ऐसे में विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाज़ारों से अपना पैसा निकालकर वापस अमेरिका ले जाना शुरू कर देते हैं ताकि उन्हें कम जोखिम में बेहतर रिटर्न मिल सके.
भारतीय रुपये पर दबाव- जब विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा निकालकर अमेरिका ले जाएंगे, तो वे भारतीय रुपये को बेचकर अमेरिकी डॉलर खरीदेंगे. इससे बाज़ार में डॉलर की मांग बढ़ेगी और डॉलर मज़बूत होगा, जबकि रुपया कमज़ोर हो जाएगा.
महंगाई बढ़ सकती है- भारत अपनी ज़रूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है और इसका भुगतान डॉलर में होता है. अगर रुपया कमज़ोर होता है, तो हमें तेल खरीदने के लिए ज़्यादा रुपये चुकाने पड़ेंगे. इससे देश में पेट्रोल, डीजल और माल ढुलाई महंगी हो जाएगी, जिससे आम सामान के दाम भी बढ़ सकते हैं.
शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव- विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs भारतीय शेयर बाज़ार से जब भारी मात्रा में पैसा बाहर निकालते हैं, तो बाज़ार में गिरावट या तेज़ी से उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. इस साल की शुरुआत से ही विदेशी निवेशक भारतीय बाज़ार से काफी पैसा निकाल चुके हैं.
आपकी बैंक EMI बढ़ सकती है- अगर अमेरिकी दरें ऊंची रहती हैं और भारत में महंगाई का ख़तरा बढ़ता है, तो भारतीय रिज़र्व बैंक को भी देश में ब्याज दरें स्थिर रखनी पड़ सकती हैं या बढ़ानी पड़ सकती हैं. ऐसा होने पर बैंकों के होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, जिससे आपकी मासिक किश्त महंगी हो सकती है.
शॉर्ट में कहें तो, अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से डॉलर मज़बूत होता है. इसके असर से भारत से विदेशी पैसा बाहर जाने का डर रहता है, रुपया कमज़ोर हो सकता है, और पेट्रोल-डीजल से लेकर आपके लोन की EMI तक सब कुछ थोड़ा महंगा हो सकता है.