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India Daily

US Fed का बड़ा फैसला, 2023 के बाद पहली बार बढ़ी ब्याज दरें; भारत पर क्या होगा असर?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. 2023 के बाद पहली बार दरें बढ़ाई गई हैं. फेड ने महंगाई को फैसले की प्रमुख वजह बताया है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
US Fed का बड़ा फैसला, 2023 के बाद पहली बार बढ़ी ब्याज दरें; भारत पर क्या होगा असर?
Courtesy: ai generated

नई दिल्ली: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दो दिवसीय बैठक के बाद ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला किया है. केंद्रीय बैंक ने फेडरल फंड्स रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की. इसके बाद दरों का लक्ष्य दायरा 3.75 से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गया है. यह 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है.

2023 के बाद पहली बार बढ़ीं ब्याज दरें

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत बढ़ोतरी के पक्ष में सर्वसम्मति से फैसला किया. 12 सदस्यों ने दर बढ़ाने का समर्थन किया. फेड के अनुसार अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और घरेलू खर्च में भी मजबूती दिखाई दे रही है. ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंक का मुख्य ध्यान कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने पर है. दर बढ़ने के बाद अमेरिकी फेडरल फंड्स रेट 3.75 से 4 प्रतिशत के नए दायरे में पहुंच गया है.

महंगाई अभी भी फेड के लक्ष्य से ऊपर

फेड के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को लेकर बनी हुई है. अगस्त में अमेरिका की उपभोक्ता महंगाई दर 3.4 प्रतिशत रही, जो जुलाई के समान स्तर पर है. हालांकि मासिक आधार पर इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन यह फेड के 2 प्रतिशत के दीर्घकालिक लक्ष्य से काफी ऊपर है. केंद्रीय बैंक ने कहा कि अर्थव्यवस्था में मांग मजबूत रहने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है और महंगाई को लक्ष्य तक लाने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.

एनर्जी और टैरिफ ने बढ़ाई चिंता

महंगाई के दबाव के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर व्यापक कीमतों पर पड़ सकता है. इसके अलावा अमेरिका की टैरिफ नीतियां और मजबूत घरेलू मांग भी महंगाई को प्रभावित कर रही हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश और उससे पैदा हुई मांग को भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के एक कारण के रूप में देखा जा रहा है. इन परिस्थितियों में फेड के लिए महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना अहम है.

भारत पर भी पड़ सकता है असर

अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ भारत पर भी देखने को मिल सकता है. ऊंची अमेरिकी दरें निवेशकों को डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित कर सकती हैं. इससे भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर दबाव बन सकता है. इसका असर भारतीय शेयर बाजार और रुपये की विनिमय दर पर भी पड़ने की संभावना रहती है. हालांकि वास्तविक प्रभाव वैश्विक बाजारों की प्रतिक्रिया और आगे फेड के फैसलों पर निर्भर करेगा.