नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि अगर सरकार कुछ यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की इजाजत देती है, तो इसका खर्च कौन उठाएगा, यह तय करना फिलहाल जल्दबाजी होगी. 5 अगस्त को मॉनिटरी पॉलिसी के ऐलान के बाद गवर्नर ने साफ किया कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम मुफ्त में नहीं चलते हैं और इसकी लागत किसी न किसी को तो उठानी ही पड़ेगी.
फिलहाल ग्राहकों, दुकानदारों या किसी भी तरह के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगाया गया है. हाल ही में संसद में पेश किए गए 'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक 2026 में UPI चार्जेस, MDR की दर या 2000 की किसी सीमा का कोई जिक्र नहीं है. MDR वह फीस होती है जिसे दुकानदार डिजिटल पेमेंट की सुविधा देने के बदले बैंक या पेमेंट कंपनियों को देते हैं. यह सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाला टैक्स या चार्ज नहीं है.
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि सरकार 2000 रुपये से ऊपर के कारोबारी UPI ट्रांजैक्शन पर 0.5% से कम का MDR लगाने की अनुमति दे सकती है. हालांकि दो आम लोगों के बीच होने वाले पर्सनल ट्रांसफर पहले की तरह बिल्कुल फ्री रहेंगे.
मौजूदा नियमों यानी भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 के मुताबिक बैंकों या कंपनियों को UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट्स पर कोई भी चार्ज वसूलने की इजाजत नहीं है.
नया बिल इसी नियम में बदलाव का प्रस्ताव रखता है. इसके पास होने के बाद, सरकार खुद यह तय कर सकेगी कि कौन से डिजिटल पेमेंट पूरी तरह फ्री रहेंगे और किस पर फीस ली जा सकती है. जब तक यह बिल कानून नहीं बन जाता और सरकार अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक जीरो-MDR यानी फ्री पेमेंट का नियम लागू रहेगा.
खबरों की मानें तो 2000 से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर MDR लगाने के अलावा दुकानदारों के सालाना टर्नओवर के हिसाब से फीस तय करने पर विचार चल रहा है. हालांकि, ये सभी सिर्फ सुझाव हैं और इन्हें बिल में शामिल नहीं किया गया है.
देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जनवरी 2020 में UPI और रूपे डेबिट कार्ड से MDR पूरी तरह खत्म कर दिया था. इसके बाद बैंकों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार उन्हें वित्तीय मदद देती आ रही है. दूसरी तरफ, बैंकों और पेमेंट कंपनियों का तर्क है कि सर्वर, साइबर सिक्योरिटी और नई टेक्नोलॉजी पर भारी खर्च होता है.
UPI सिस्टम को बेहतर बनाए रखने के लिए कमाई का एक जरिया होना जरूरी है. जुलाई के महीने में ही UPI के जरिए 29.88 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड 23.66 अरब ट्रांजैक्शन हुए हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था में इसकी बड़ी भूमिका को दर्शाते हैं.