नई दिल्ली: रिलायंस कम्युनिकेशंस और बैंक धोखाधड़ी से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में अब न्यायपालिका का सख्त रुख सामने आया है. उद्योगपति अनिल अंबानी ने अपना पक्ष रखते हुए कर्ज चुकाने की इच्छा जताई है, लेकिन मामला कानूनी पेचीदगियों और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली के कारण उलझता जा रहा है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल पैसा चुकाने की बात से आपराधिक जांच पर असर नहीं पड़ेगा. जनता का सिस्टम पर भरोसा बना रहे, इसके लिए समयबद्ध और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है.
उद्योगपति अनिल अंबानी ने बैंकों के भारी-भरकम कर्ज को कम करने के लिए एक नया किश्त आधारित सेटलमेंट प्लान अदालत के सामने रखा है. उनका कहना है कि वे पूरा पैसा एक साथ देने की स्थिति में नहीं हैं. इसलिए उन्हें धीरे-धीरे भुगतान करने की अनुमति मिलनी चाहिए. हालांकि अंबानी का आरोप है कि चल रही कानूनी कार्यवाही के कारण बैंक उनके साथ किसी भी प्रकार की सेटलमेंट की बातचीत करने से कतरा रहे हैं. वे चाहते हैं कि भुगतान प्रक्रिया जल्द शुरू हो.
जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और ईडी के सुस्त रवैये पर कड़ा प्रहार किया है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जांच जिस धीमी गति से चल रही है, उससे आम लोगों का कानून और न्याय व्यवस्था पर भरोसा डगमगा सकता है. अदालत ने एजेंसियों के व्यवहार को 'अस्वीकार्य' करार देते हुए निर्देश दिया कि जांच समय पर पूरी होनी चाहिए. कोर्ट ने एजेंसियों को कड़ी चेतावनी दी कि उनकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता साफ तौर पर दिखाई देनी चाहिए.
एजेंसियों ने अदालत को सूचित किया कि इस कथित धोखाधड़ी में बैंकों को 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है. मामले की संवेदनशीलता और नुकसान की विशालता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है. ईडी के अनुसार इस पूरे मामले में कुछ ऐसे लेंडर्स के माध्यम से दिवाला याचिकाएं दाखिल की गईं, जिनका इस केस से कोई सीधा संबंध ही नहीं था. यह एक बड़ी वित्तीय साजिश हो सकती है.
ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि आईबीसी के तहत किए गए अधिग्रहणों को आठ एनबीएफसी कंपनियों के माध्यम से फंड किया गया था. सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि लगभग 2,800 करोड़ रुपये से ज्यादा के बड़े दावों को मात्र 80 करोड़ रुपये में निपटा दिया गया. वहीं सेबी (SEBI) की एक पुरानी रिपोर्ट में भी अनिल अंबानी पर फंड्स की साइफनिंग या हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. अदालत अब इन सभी वित्तीय विसंगतियों को बहुत ही गंभीरता से देख रही है.
सीबीआई की कार्रवाई अब रिलायंस कम्युनिकेशंस के चारों ओर केंद्रित हो गई है. जहां 2,929 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का संदेह है. जांच अधिकारियों ने अनिल अंबानी से घंटों सवाल-जवाब किए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि बैंकों से मिले लोन की राशि को अन्य मदों में डाइवर्ट तो नहीं किया गया. एसबीआई की शिकायत इस जांच की मुख्य धुरी बनी हुई है. अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी.