नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टो एक्सचेंज Binance के संस्थापक चांगपेंग झाओ ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपने शुरुआती संघर्षों का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि कैसे बिना नौकरी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बिटकॉइन पर बड़ा दांव लगाया.
शंघाई का अपना अपार्टमेंट बेचकर बिटकॉइन खरीदने का उनका फैसला आज उन्हें अरबपति बना चुका है. यह कहानी जोखिम, विश्वास और समय की ताकत को दर्शाती है.
झाओ ने बताया कि 2013 में एक मित्र ने उन्हें अपनी कुल संपत्ति का 10 प्रतिशत बिटकॉइन में लगाने की सलाह दी. मित्र ने कहा था कि इसमें शून्य पर जाने की संभावना कम और दोगुना होने की संभावना अधिक है. छह महीने तक अध्ययन करने के बाद झाओ निवेश के लिए आश्वस्त हुए. उस समय बिटकॉइन 70 डॉलर से बढ़कर 1,000 डॉलर तक पहुंच चुका था.
दिसंबर 2013 में लास वेगास में आयोजित बिटकॉइन सम्मेलन ने उनके निर्णय को मजबूत किया. करीब 200 लोगों की उस बैठक में उद्योग के प्रमुख लोग मौजूद थे. झाओ ने वहीं तय किया कि उन्हें इसी क्षेत्र में काम करना है. लौटकर उन्होंने अपने साझेदारों से बिटकॉइन भुगतान प्रणाली शुरू करने का प्रस्ताव रखा.
उस समय उनके पास लगभग एक बिटकॉइन था जिसकी कीमत करीब 1,000 डॉलर थी. अधिक निवेश के लिए उन्होंने शंघाई का अपना अपार्टमेंट बेच दिया. उन्हें 9 लाख डॉलर मिले, जिनसे उन्होंने औसतन 600 डॉलर प्रति बिटकॉइन की दर से खरीदारी की. आज बिटकॉइन की कीमत लगभग 67,000 डॉलर है.
2024 में झाओ ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में विफल रहने का दोष स्वीकार किया और चार महीने की सजा काटी. अमेरिकी सरकार के साथ 4.3 अरब डॉलर के समझौते के तहत उन्होंने Binance के CEO पद से इस्तीफा दिया, लेकिन कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखी.
ब्लूमबर्ग के अनुसार, झाओ की मौजूदा संपत्ति 52.2 अरब डॉलर है. 2025 में उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा क्षमादान भी मिला. 2017 में स्थापित Binance ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई और उनका जोखिम भरा फैसला इतिहास बन गया.