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India Daily

शेयर मार्केट में 6 लाख करोड़ स्वाहा, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निफ्टी 25000 के नीचे, जानें क्रैश की 5 बड़ी वजहें

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी गिरावट देखने को मिली है. बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों अहम सपोर्ट लेवल टूटने से दबाव में आ गए. ग्लोबल तनाव, कमजोर नतीजों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए.

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Edited By: Babli Rautela
शेयर मार्केट में 6 लाख करोड़ स्वाहा, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निफ्टी 25000 के नीचे, जानें क्रैश की 5 बड़ी वजहें
Courtesy: Social Media

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे सत्र में भारी बिकवाली देखने को मिली है. सेंसेक्स इंट्राडे में 1000 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 अक्टूबर 2025 के बाद पहली बार 25000 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया है. इस गिरावट ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया. सेंसेक्स 1056 अंक गिरकर दिन के निचले स्तर 81124 तक पहुंच गया, वहीं निफ्टी करीब 1.2 प्रतिशत गिरकर 24920 तक फिसल गया है. इस तेज बिकवाली के चलते बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 449.76 लाख करोड़ रुपये रह गया और निवेशकों की करीब 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई.

यह गिरावट ऐसे समय आई है जब बाजार एक साथ कई दबावों से जूझ रहा है. ग्लोबल अनिश्चितता, कमजोर घरेलू कमाई, गिरता रुपया और लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने माहौल को और नकारात्मक बना दिया है.

  • ट्रंप की ग्रीनलैंड धमकियों से ग्लोबल टेंशन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों और यूरोप के खिलाफ नए टैरिफ की धमकियों से वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बन गया. निवेशकों को एक नए ट्रेड वॉर की आशंका सताने लगी.

एशियाई बाजारों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई. जापान का निक्केई पांचवें सत्र में भी फिसल गया. वॉल स्ट्रीट में भी एक रात पहले बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. इस ग्लोबल दबाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा.

  • बड़ी कंपनियों के कमजोर नतीजे

घरेलू स्तर पर भी हालात बेहतर नहीं रहे. रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के नतीजों ने निवेशकों को निराश किया. इससे यह डर बढ़ गया कि ऊंचे वैल्यूएशन अब फंडामेंटल्स से आगे निकल चुके हैं.

आईटी सेक्टर में भी दबाव दिखा और आईटी इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत गिर गया. कई ब्रोकरेज हाउस ने आउटलुक को लेकर सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार की चौड़ाई और कमजोर हो गई.

  • रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर

भारतीय रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. कमजोर रुपये ने इक्विटी निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी. इस महीने रुपया करीब 1.5 प्रतिशत टूट चुका है, जबकि 2025 में अब तक इसमें करीब 5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है.

गिरते रुपये से आयातित महंगाई और विदेशी निवेशकों के सेंटिमेंट पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. भारतीय रिज़र्व बैंक ने किसी एक स्तर को बचाने के बजाय अस्थिरता कम करने के लिए सीमित हस्तक्षेप किया.

  • विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार ग्यारहवें सत्र में भी शुद्ध विक्रेता बने रहे. 20 जनवरी को FIIs ने करीब 2938 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशक जोखिम से दूरी बनाए हुए हैं.

हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ खरीदारी की, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए काफी नहीं रही. विदेशी आउटफ्लो ही बाजार की दिशा तय करता नजर आया.

  • टेक्निकल चार्ट्स दे रहे हैं कमजोरी के संकेत

टेक्निकल रूप से भी बाजार का ढांचा कमजोर हुआ है. निफ्टी और सेंसेक्स ने अपने अहम सपोर्ट लेवल तोड़ दिए हैं. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक निफ्टी 25500 के नीचे रहेगा, तब तक दबाव बना रह सकता है और आगे और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि ओवरसोल्ड स्थिति के कारण बीच बीच में हल्की रिकवरी आ सकती है, लेकिन मौजूदा ट्रेंड अभी भी निगेटिव बना हुआ है.

कुल मिलाकर आज का मार्केट क्रैश इस बात का संकेत है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं. ग्लोबल संकेत, कमजोर नतीजे और विदेशी बिकवाली जब तक थमती नहीं, तब तक बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है.