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चांदी में भारी गिरावट! ऑल टाइम हाई से 2.06 लाख रुपये सस्ती, सोना भी 56000 टूटा; क्या रही वजह?

सोना-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है. मंगलवार को चांदी 11,000 रुपये सस्ती होकर 2 लाख के नीचे आ गई. अब चांदी अपने हाई से 2.06 लाख रुपये सस्ती है, जबकि सोना 56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है.

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Kuldeep Sharma

मुंबई: कीमती धातुओं के बाजार में मंगलवार को भी भारी गिरावट देखने को मिली. ट्रंप के ईरान पर हमला टालने के फैसले के बाद निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ गई, जिससे सोना और चांदी दोनों की मांग घटी है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी एक झटके में 11,000 रुपये सस्ती हो गई. सोना भी 2,500 रुपये प्रति 10 ग्राम टूट गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुएं कमजोर नजर आईं. निवेशक अब देख रहे हैं कि कब तक ये गिरावट रुकती है.

चांदी का भाव खुलते ही धड़ाम

मंगलवार को चांदी का भाव खुलते ही तेजी से गिरा. पिछले दिन 2,25,167 रुपये पर बंद होने के बाद आज ओपनिंग 2,13,562 रुपये पर हुई. एक ही दिन में 11,605 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई. अब चांदी 2 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर के नीचे आ चुकी है. 29 जनवरी को चांदी ने 4,20,048 रुपये का जीवनकाल का उच्चतम स्तर छुआ था. उस हाई से अब यह 2,06,486 रुपये सस्ती हो गई है. निवेशकों के लिए यह काफी बड़ा नुकसान है.

सोने की कीमत में भी तेज गिरावट

सोने की कीमत भी मंगलवार को बुरी तरह प्रभावित हुई. 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 2,576 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया. सोमवार को 1,39,260 रुपये पर बंद होने के बाद आज यह 1,36,684 रुपये पर खुला. 29 जनवरी को सोने ने 1,93,096 रुपये का हाई बनाया था. उस स्तर से अब सोना 56,412 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता चल रहा है. घरेलू बाजार में सोने की मांग भी कम हुई है.

देशी बाजार में भी कमजोरी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी पर दबाव बना हुआ है. कॉमेक्स पर सोना करीब 2 फीसदी गिरकर 4,317 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. चांदी 66.89 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती न करने के फैसले ने इन धातुओं पर असर डाला है. मिडिल ईस्ट में युद्ध की अनिश्चितता के बावजूद निवेशक सुरक्षित जगहों से पैसा निकाल रहे हैं.

गिरावट के पीछे मुख्य कारण

गिरावट के कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण ट्रंप का ईरान पर हमला पांच दिन के लिए टालना है, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई और महंगाई का डर कम हुआ. इसके अलावा अमेरिकी फेड रिजर्व ने ब्याज दरें नहीं घटाईं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ. ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है. इन सब फैक्टर्स ने मिलकर सोना-चांदी की कीमतों को नीचे धकेला है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति स्पष्ट होने पर ही रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है.