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India Daily

विदेशी निवेशकों को लुभाने का बड़ा दांव! SEBI ने Nifty India FPI 150 में F&O ट्रेडिंग को दी मंजूरी

सेबी ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 'निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स' में वायदा कारोबार को मंजूरी दी है. इससे वैश्विक निवेशकों को भारतीय बाजार में हेजिंग और निवेश के नए विकल्प मिलेंगे.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
विदेशी निवेशकों को लुभाने का बड़ा दांव! SEBI ने Nifty India FPI 150 में F&O ट्रेडिंग को दी मंजूरी
Courtesy: social media

मुंबई: भारत के बाजार नियामक सेबी ने 'निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स' में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी वायदा कारोबार को हरी झंडी दे दी है. यह इंडेक्स खास तौर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. माना जा रहा है कि इस फैसले से वैश्विक निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना और भी आसान हो जाएगा.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने इस इंडेक्स को इसलिए शुरू किया था ताकि विदेशी निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखने का एक सीधा और पारदर्शी जरिया मिल सके, जो विदेशों से आने वाले निवेश के लिए सबसे सही हैं. अब सेबी की मंजूरी मिलने के बाद, इस इंडेक्स से जुड़े डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग हो सकेगी, जिससे निवेशकों को अपने जोखिम को कम करने हेजिंग और निवेश करने के लिए नए विकल्प मिलेंगे.

क्या है निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स?

यह इंडेक्स 'निफ्टी 500' में से चुनी गई 150 कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखता है. इन कंपनियों का चुनाव उनकी बेहतरीन लिक्विडिटी विदेशी निवेश के लिए उपलब्ध शेयरों की बड़ी संख्या और विदेशी निवेशकों के बीच उनकी मजबूत साख के आधार पर किया गया है. जिन कंपनियों पर विदेशी निवेश को लेकर किसी तरह की पाबंदी है, उन्हें इसमें शामिल नहीं किया गया है. इस इंडेक्स को इस तरह से डिजाइन किया गया है जिससे विदेशी निवेशकों पर केंद्रित 'इंडेक्स फंड्स' और 'ईटीएफ' जैसे नए वित्तीय प्रॉडक्ट्स आसानी से लॉन्च किए जा सकें.

कैसे चुने जाते हैं शेयर?

इस इंडेक्स में शेयरों का चुनाव पिछले छह महीनों के दौरान उनकी औसत 'फॉरेन इन्वेस्टिबल फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन' के आधार पर होता है. हर तिमाही तीन महीने में इस इंडेक्स की समीक्षा की जाती है, और मार्च, जून, सितंबर व दिसंबर में इसमें जरूरी बदलाव किए जाते हैं.

बाजार पर क्या होगा असर?

F&O ट्रेडिंग की शुरुआत होने से भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है. इस इंडेक्स में शामिल कंपनियों को पैसिव इन्वेस्टमेंट यानी इंडेक्स को फॉलो करने वाले फंड्स के जरिए फायदा मिल सकता है, वहीं समीक्षा के दौरान जो कंपनियां इससे बाहर की जाएंगी, उनके शेयरों पर बिकवाली का दबाव दिख सकता है. अगर दुनिया भर के बड़े ईटीएफ प्रदाता इस इंडेक्स को एक मानक के रूप में अपनाते हैं, तो भारत में भारी मात्रा में विदेशी फंड आ सकता है.

किस सेक्टर की कितनी हिस्सेदारी है?

इस इंडेक्स में सबसे ज्यादा दबदबा फाइनेंशियल सर्विसेज का है, जिसकी हिस्सेदारी 26.15% है. इसके बाद अन्य मुख्य सेक्टर्स आते हैं-

  • ऑयल, गैस एंड कंज्यूमेबल फ्यूल्स: 10.03%
  • हेल्थकेयर: 7.51%
  • इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT): 7.39%
  • ऑटोमोबाइल एंड ऑटो कंपोनेंट्स: 7.27%
  • कैपिटल गुड्स: 5.55%
  • सबसे ज्यादा वेटेज वाली कंपनियां

इंडेक्स की सबसे बड़ी कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, इंफोसिस, लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक शामिल हैं.

कैसा रहा है प्रदर्शन?

निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स को 16 अगस्त 2025 को लॉन्च किया गया था, जिसका बेस ईयर अक्टूबर 2022 और बेस वैल्यू 1,000 रखी गई थी. 30 जून के आंकड़ों के मुताबिक, इस इंडेक्स ने साल 2026 में अब तक -5.22% का रिटर्न दिया है, जबकि एक साल का रिटर्न -2.81% रहा है. हालांकि, अपनी शुरुआत से लेकर अब तक इसने कुल 12.15% की बढ़त दर्ज की है. नए डेरिवेटिव्स को मिली इस मंजूरी से दुनिया भर के निवेशकों के बीच भारत का आकर्षण बढ़ेगा और भारत केंद्रित नए निवेश साधनों के विकास को मजबूती मिलेगी.