दुनिया भर के बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता का माहौल है. ऐसे में मशहूर निवेशक और 'रिच डैड पुअर डैड' किताब के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बड़ी चेतावनी दी है. उनका कहना है कि साल 2026 में शेयर बाजार में भारी गिरावट आ सकती है. उन्होंने नास्त्रेदमस और एडगर कैस जैसे भविष्यवक्ताओं के पूर्वानुमानों का हवाला देते हुए कहा कि हालांकि ये भविष्यवाणियां सच भी हो सकती हैं और नहीं भी, लेकिन निवेशकों को तैयार रहना चाहिए.
रॉबर्ट कियोसाकी का मानना है कि बाजार में गिरावट को सिर्फ नुकसान का मौका नहीं समझना चाहिए. उनके अनुसार, जब बाजार धड़ाम होता है तो असली संपत्तियां सस्ती हो जाती हैं और समझदार निवेशक उन्हें खरीदकर अमीर बनते हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग पहले से तैयारी कर लेंगे, वही मंदी के बाद मजबूत स्थिति में होंगे. जो पारंपरिक निवेश पर निर्भर रहेंगे, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
MY APOLOGIES:
— Robert Kiyosaki (@theRealKiyosaki) March 27, 2026
In my previous X I quoted futurists Nostradamus’ 1500 and Edgar Caycees 1940 prediction that a global economic crisi would begin in 2026.
A friend contacted me. He was upset with me because I stated I was going to richer during the 2026 crisis.
His problem was…
कियोसाकी ने साफ कहा कि वह खुद स्टॉक, बॉन्ड या ईटीएफ में निवेश नहीं करते. उनका पोर्टफोलियो रियल एस्टेट, तेल, खाद्य उत्पादन, सोना, चांदी, बिटकॉइन और एथेरियम जैसी वास्तविक संपत्तियों पर टिका है. उनका तर्क है कि जब सरकारें अधिक पैसा छापती हैं तो कागजी संपत्तियों की कीमत घटती है. ऐसे में जिन चीजों की सप्लाई बढ़ाई नहीं जा सकती, वे सुरक्षित मानी जाती हैं.
कियोसाकी ने अपने निवेश का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी दौलत रातों-रात नहीं बनी. उन्होंने छोटी-छोटी संपत्तियां खरीदीं और लंबे समय तक उन्हें संभाल कर रखा. उन्होंने बिटकॉइन खरीदने का किस्सा सुनाया, जब उन्होंने अपना लगभग सारा पैसा लगाकर पहली बार बिटकॉइन खरीदा था और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद उसे बेचा नहीं. उनका कहना है कि सही समय देखने से ज्यादा जरूरी धैर्य और अनुशासन है.
कियोसाकी ने वॉरेन बफे का उदाहरण देते हुए कहा कि दिग्गज निवेशक भी मंदी का इंतजार करते हैं ताकि सस्ते में संपत्तियां खरीद सकें. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कच्चे तेल के दाम, भू-राजनीतिक संकट और मंदी की आशंका के बीच निवेशकों के लिए सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि बाजार गिरेगा या नहीं, बल्कि यह है कि अगर गिरावट आती है तो क्या वे उसके लिए तैयार हैं.