नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद आर्थिक तंगी से बचने के लिए सही योजना बनाना बेहद जरूरी है. बढ़ती महंगाई, मेडिकल इमरजेंसी और जीवनशैली में बदलाव को देखते हुए सुरक्षित निवेश की जरूरत होती है. सरकार द्वारा संचालित पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ) और नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) ऐसे ही विकल्प हैं. ये बैंक एफडी से ज्यादा ब्याज देते हैं और टैक्स छूट का लाभ भी दिलाते हैं.
पीपीएफ सरकारी बचत योजना है, जिसमें निवेश, मैच्योरिटी राशि और ब्याज तीनों पर टैक्स छूट मिलती है. इसे ईईई (EEE) बेनिफिट कहते हैं. इस तिमाही में इस पर 7.1 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है. यह योजना डाकघरों और सार्वजनिक बैंकों जैसे एसबीआई, कैनरा बैंक, पीएनबी के अलावा कुछ निजी बैंकों से भी खोली जा सकती है.
पीपीएफ खाते में न्यूनतम 100 से 500 रुपये मासिक जमा करना होता है. खाता खोलने के लिए आधार कार्ड, पते का प्रमाण और फोटो जैसे दस्तावेज चाहिए. इसे ऑनलाइन बैंकिंग से भी खोला जा सकता है. पुरानी टैक्स व्यवस्था में धारा 80सी के तहत सालाना 1.5 लाख रुपये तक का निवेश टैक्स फ्री है. नई व्यवस्था में अभी यह सुविधा नहीं है.
ईपीएफ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा संचालित किया जाता है. यह योजना सिर्फ नौकरीपेशा लोगों के लिए है. जिनका मूल वेतन और महंगाई भत्ता 15 हजार रुपये तक है, उनके लिए यह अनिवार्य है. इससे ज्यादा वेतन वाले वॉलंटरी कंट्रीब्यूशन कर सकते हैं. इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं. वर्तमान में ईपीएफ पर 8.25 फीसदी ब्याज मिल रहा है.
पुरानी टैक्स व्यवस्था में कर्मचारी के 1.5 लाख रुपये सालाना योगदान पर धारा 80सी में छूट मिलती है. नियोक्ता के 12 फीसदी योगदान (7.5 लाख से कम पर) पर दोनों व्यवस्थाओं में छूट है. कर्मचारी के जमा ब्याज पर 2.5 लाख रुपये तक टैक्स नहीं लगता. नियोक्ता के योगदान पर मिलने वाला ब्याज भी पूरी तरह टैक्स फ्री है.
एनपीएस 18 से 70 साल के सभी नागरिकों (सेना को छोड़कर) के लिए खुला है. इसमें दो तरह के खाते होते हैं. टियर-1 में न्यूनतम 500 रुपये जमा करना होता है और निकासी पर कुछ पाबंदियां हैं. धारा 80सीसीडी के तहत इसमें 2 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है. टियर-2 के लिए टियर-1 खाता होना जरूरी है. एनपीएस बाजार से जुड़ी योजना है, जिसमें एलोकेशन के हिसाब से 9-12 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है.