आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये के बड़े फ्रॉड का मामला सुर्खियों में है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंक इस घटना पर कड़ी नजर रख रहा है, लेकिन यह पूरे बैंकिंग सिस्टम की समस्या नहीं है. मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने खाता बंद करने की सामान्य प्रक्रिया शुरू की.
बैंक ने बैलेंस ट्रांसफर से पहले जांच की तो सरकारी दावा और बैंक रिकॉर्ड में बड़ा अंतर दिखा. इसके बाद 18 फरवरी से कई अन्य सरकारी विभागों ने भी यही शिकायत की. अब बैंक ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और रेगुलेटर को सूचित किया है. इस खबर से बैंक के शेयरों में तेज गिरावट आई है.
हरियाणा सरकार के एक विभाग ने सामान्य तौर पर खाता बंद करने का बैंक से अनुरोध किया था. बैंक ने फंड ट्रांसफर से पहले बैलेंस चेक किया तो सरकारी दावे और बैंक रिकॉर्ड में करोड़ों का फर्क नजर आया. इस मिसमैच ने संदेह पैदा किया. जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई और मामला 590 करोड़ तक पहुंच गया.
18 फरवरी के बाद हरियाणा के कई अन्य सरकारी विभागों ने बैंक से संपर्क किया. उन्होंने भी अपने खातों में बैलेंस की कमी की शिकायत की. इन शिकायतों ने जांच को और गहरा कर दिया. बैंक ने उच्च स्तरीय बैठकें कीं और रिकॉन्सिलिएशन प्रक्रिया शुरू की. अब पूरी स्थिति की पड़ताल हो रही है.
संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई इस मामले पर पूरी नजर रखे हुए है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कोई सिस्टेमिक समस्या नहीं है. बैंकिंग सिस्टम में ऐसी घटनाएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन पूरे सिस्टम पर इसका असर नहीं पड़ता. उनका बयान बाजार को स्थिर करने के लिए आया है.
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने तुरंत आंतरिक जांच शुरू कर दी है. बैंक ने रेगुलेटर और अन्य संबंधित अथॉरिटी को भी सूचना दे दी है. उच्च स्तरीय मीटिंग्स हुईं और फ्रॉड की गहराई समझने की कोशिश की जा रही है. बैंक ने कहा कि जांच पूरी होने पर और जानकारी साझा की जाएगी.
इस खबर के बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में तेज गिरावट आई. निवेशकों में चिंता बढ़ी है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई के आश्वासन से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन जांच के नतीजे का इंतजार करना होगा. यह बैंक के लिए बड़ा संकट बन सकता है.