भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने नियमों की अनदेखी करने वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों NBFCs पर एक बार फिर बड़ा चाबुक चलाया है. आरबीआई ने जून महीने में एक साथ 135 वित्तीय कंपनियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी कि लाइसेंस रद्द कर दिए हैं. इससे पहले मई में भी केंद्रीय बैंक ने करीब 150 एनबीएफसी पर ऐसी ही कड़ी कार्रवाई की थी. लगातार हो रही इस कार्रवाई से साफ है कि आरबीआई वित्तीय क्षेत्र में सुधार लाने और बैंकिंग नियमों को पूरी तरह लागू करवाने के लिए बेहद गंभीर है.
बुधवार को जारी एक प्रेस रिलीज में आरबीआई ने बताया कि इन कंपनियों के लाइसेंस 'आरबीआई एक्ट, 1934' की धारा 45-आईए (6) के तहत रद्द किए गए हैं. ये कंपनियां केंद्रीय बैंक द्वारा तय किए गए जरूरी नियमों और वित्तीय मानकों को पूरा करने में नाकाम साबित हुई थीं.
एनबीएफसी ऐसी वित्तीय संस्थाएं होती हैं जो पारंपरिक बैंकों की तरह ही लोगों को लोन, इन्वेस्टमेंट, लीजिंग और अन्य वित्तीय सुविधाएं देती हैं लेकिन इनके पास पूरी तरह से बैंकिंग का लाइसेंस नहीं होता. चूंकि देश के फाइनेंशियल सिस्टम में इनकी बड़ी भूमिका होती है इसलिए पारदर्शिता, स्थिरता और ग्राहकों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए आरबीआई इन पर कड़ी नजर रखता है.
इस ताजा कार्रवाई की चपेट में कई जानी-मानी कंपनियां आई हैं. इनमें एक्सप्रेस फिनकैप हाउस, अक्षय फिस्कल सर्विसेज, टाइम्स फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, जुपिटर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, जुपिटर फिनवेस्ट, एसेल फाइनेंस बिजनेस लोन्स और सिटीवाइड फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कंपनियां शामिल हैं. लाइसेंस रद्द होने के बाद अब ये कंपनियां एनबीएफसी से जुड़ा कोई भी काम नहीं कर सकेंगी.
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार जिन कंपनियों पर गाज गिरी है उनमें से एक बहुत बड़ी संख्या पश्चिम बंगाल की कंपनियों की है. इस कार्रवाई के बाद पूरे सेक्टर में हड़कंप मच गया है और बाकी कंपनियां भी अब अपने नियमों और कागजातों को दुरुस्त करने में जुट गई हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक का यह कदम निवेशकों और ग्राहकों के पैसों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है. इससे पूरे मार्केट में एक कड़ा संदेश गया है कि नियमों में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.