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India Daily

RBI ने किया 25,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचने का ऐलान, आम आदमी को कैसे होगा फायदा?

 RBI ने बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी निकालने के लिए 25,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचने की घोषणा की है. इससे सोमवार को बॉन्ड यील्ड बढ़ने की संभावना है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
RBI ने किया 25,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचने का ऐलान, आम आदमी को कैसे होगा फायदा?
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 9 अक्टूबर को खुले बाजार परिचालन (OMO) के तहत 25,000 करोड़ रुपये के सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री की घोषणा की. इस कदम का मकसद बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करना है. बाजार के जानकारों का अनुमान है कि इस घोषणा का असर सरकारी बॉन्ड की कीमतों पर पड़ सकता है और सोमवार को उनकी यील्ड 4-5 आधार अंक बढ़कर खुल सकती है.

13 अक्टूबर को होगी नीलामी

RBI के मुताबिक, सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी 13 अक्टूबर को मल्टीपल-प्राइस पद्धति से होगी. इसमें 2030 से 2034 के बीच परिपक्व होने वाली छह प्रतिभूतियां शामिल हैं. इनमें 7.88 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूति 2030, 6.10 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूति 2031, 7.95 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूति 2032, 7.26 प्रतिशत और 7.18 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूतियां 2033 तथा 7.10 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूति 2034 शामिल हैं. केंद्रीय बैंक ने प्रत्येक प्रतिभूति के लिए अलग-अलग बिक्री राशि तय नहीं की है.

सितंबर में भी RBI ने बेचे थे एक लाख करोड़ के बॉन्ड

यह घोषणा सितंबर में किए गए एक लाख करोड़ रुपये के OMO बिक्री कार्यक्रम के बाद आई है. उस दौरान RBI ने 17 सितंबर को 50,000 करोड़ रुपये और 21 तथा 28 सितंबर को 25,000-25,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे थे. तीनों नीलामियों में केंद्रीय बैंक ने घोषित पूरी राशि स्वीकार की थी. इन नीलामियों में निवेशकों की बोलियां निर्धारित राशि से अधिक रहीं, जो सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद में बाजार की रुचि दर्शाती हैं.

बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी अब भी मौजूद

RBI अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामियों का भी इस्तेमाल कर रहा है. 7 अक्टूबर को मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि चालू वित्त वर्ष में प्राकृतिक कारणों से अतिरिक्त नकदी का दबाव कम होने की उम्मीद है. अगस्त की पिछली मौद्रिक नीति बैठक के बाद से लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी के तहत औसत दैनिक अतिरिक्त नकदी 5.9 लाख करोड़ रुपये रही. RBI के ताजा आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को बैंकिंग सिस्टम में यह अधिशेष 3.92 लाख करोड़ रुपये था.

CRR नियम में बदलाव से भी पड़ सकता है असर

RBI ने बैंकों के लिए नकद आरक्षित अनुपात (CRR) की दैनिक अनिवार्य राशि बनाए रखने की सीमा भी निर्धारित आवश्यकता के 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 99 प्रतिशत कर दी है. यह बदलाव 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े में लागू होगा. हालांकि, CRR की कुल निर्धारित दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, OMO बिक्री और दैनिक CRR की सख्त शर्त से बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध नकदी पर दबाव बढ़ सकता है. इसका बॉन्ड यील्ड पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक और निवेशक इन बदलावों के अनुसार अपनी रणनीति कैसे तय करते हैं.

आम आदमी को कैसे होगा फायदा

बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब है कि सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न. ऐसे में यदि कोई इंसान सरकारी बॉन्ड में निवेश करता है तो उसे ज्यादा रिटर्न मिल सकता है. यानी बॉन्ड में निवेश करने वालों के लिए यह एक अच्छी खबर हो सकती है.