नई दिल्ली: सरकारी बैंकों को अब सिर्फ पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं तक सीमित रहने के बजाय युवाओं की बदलती जरूरतों को समझना होगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी निजी बैंकों को ज्यादा आधुनिक और आकर्षक मानती है. ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अपनी कार्यशैली और ग्राहकों से जुड़ने का तरीका बदलना होगा.
दो दिवसीय PSB Confluence 2026 के समापन सत्र में वित्त मंत्री ने युवाओं के साथ हुई अपनी बातचीत का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कई युवाओं ने निजी बैंकों को सरकारी बैंकों से ज्यादा पसंद किया, क्योंकि उन्हें निजी बैंक अधिक आधुनिक और ‘कूल’ लगते हैं. सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कहा कि वे इस धारणा को बदलने की कोशिश करें. उनका जोर सिर्फ नई तकनीक अपनाने पर नहीं, बल्कि युवाओं के अनुभव को बेहतर बनाने पर था. बैंकिंग सेवाएं आसान, व्यक्तिगत जरूरतों के मुताबिक और चौबीसों घंटे उपलब्ध होनी चाहिए.
वित्त मंत्री ने बैंकों को सलाह दी कि वे युवाओं के बैंक शाखाओं तक आने का इंतजार न करें. इसके बजाय कॉलेज, विश्वविद्यालय और कौशल विकास संस्थानों तक पहुंचकर उनसे सीधे बातचीत की जाए. इसी दिशा में 2 अक्टूबर से एक महीने का ‘Banking for Youth’ अभियान चलाने की बात कही गई है. यह अभियान 16 वर्ष और उससे अधिक उम्र के युवाओं पर केंद्रित होगा. इसका उद्देश्य केवल नए खाते खोलना नहीं, बल्कि युवाओं को पढ़ाई से लेकर नौकरी, कारोबार, निवेश और उनकी आगे की वित्तीय जरूरतों के लिए बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है.
सीतारमण ने सरकारी बैंकों को शिक्षण संस्थानों और अच्छे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी कर युवाओं के लिए मुफ्त पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया. इससे बैंक युवाओं के साथ केवल लेन-देन का रिश्ता बनाने के बजाय लंबे समय का जुड़ाव विकसित कर सकते हैं. वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि बैंक फिटनेस, योग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े वाउचर जैसे लाभ देने पर विचार कर सकते हैं. ऐसे कार्यक्रम युवाओं को बैंकिंग सेवाओं के साथ जोड़ने और उन्हें वित्तीय मामलों के प्रति जागरूक बनाने में मदद कर सकते हैं.
वित्त मंत्री ने हालांकि साफ किया कि युवाओं को आकर्षित करने के लिए बैंकिंग सुरक्षा और नियमों से कोई समझौता नहीं कर सकते. आधुनिक और युवा-केंद्रित सेवाओं के साथ ग्राहकों के पैसे और डेटा की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहेगी. सरकारी बैंकों के सामने अब चुनौती यह है कि वे अपनी भरोसेमंद छवि को बनाए रखते हुए युवाओं की पसंद के अनुरूप बदलाव करें. अगर बैंक डिजिटल सुविधा, व्यक्तिगत सेवाओं और सीधे संवाद को बेहतर तरीके से जोड़ पाते हैं, तो नई पीढ़ी के साथ उनका रिश्ता मजबूत हो सकता है.