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3 करोड़ से 4925 करोड़ रुपये हुआ मार्केट कैप! SEBI ने धेनु बिल्डकॉन के फंड रोटेशन का किया खुलासा

बाजार नियामक सेबी ने धेनु बिल्डकॉन के खिलाफ अंतरिम आदेश में कथित फंड रोटेशन का खुलासा किया है. आरोप है कि सिर्फ 25 करोड़ रुपये को बार-बार घुमाकर 1,000 करोड़ रुपये के कर्ज का रूप दिखाया गया और 840 करोड़ रुपये का प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट किया गया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
3 करोड़ से 4925 करोड़ रुपये हुआ मार्केट कैप! SEBI ने धेनु बिल्डकॉन के फंड रोटेशन का किया खुलासा
Courtesy: social media

मुंबई: शेयर बाजार नियामक सेबी की जांच में धेनु बिल्डकॉन इंफ्रा लिमिटेड से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है. नियामक के मुताबिक, जुड़े हुए संस्थानों के नेटवर्क के जरिए रकम को बार-बार घुमाया गया. इसी दौरान कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 3 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,925 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि कारोबार और मुनाफे में खास बदलाव नहीं हुआ.

25 करोड़ रुपये को घुमाकर दिखाया 1,000 करोड़ का कर्ज

सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में धेनु बिल्डकॉन ने सात संस्थाओं से करीब 1,000 करोड़ रुपये का असुरक्षित कर्ज मिलने का दावा किया. इसके बाद दिसंबर 2025 में कथित कर्ज की 840 करोड़ रुपये की राशि को छह संस्थाओं को शेयर जारी करके इक्विटी में बदल दिया गया.

लेकिन बैंक खातों की जांच में नियामक को अलग तस्वीर दिखाई दी. सेबी का आरोप है कि 1,000 करोड़ रुपये की रकम वास्तव में एक ही 25 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि को संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों में बार-बार भेजकर तैयार की गई. जांच में यह भी दावा किया गया कि शुरुआती 25 करोड़ रुपये की रकम भी दूसरे जुड़े संस्थानों के बीच संदिग्ध लेनदेन के जरिए आई थी.

कंपनियों के बीच कनेक्शन ने बढ़ाया शक

सेबी ने धेनु बिल्डकॉन, कथित कर्ज देने वाली संस्थाओं और शेयर पाने वाली कंपनियों के बीच कई समानताएं भी दर्ज की हैं. इनमें एक जैसे पते, निदेशक, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और बैंक शाखाओं के इस्तेमाल के साथ-साथ आपस में शेयर हिस्सेदारी जैसी कड़ियां शामिल थीं.

नियामक के मुताबिक, इन संस्थाओं पर सुरेंद्र कुमार जैन और वीरेंद्र जैन का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण बताया गया. सेबी ने एक अलग मामले की तलाशी के दौरान मिले चैट संदेशों और कॉल रिकॉर्ड को भी अपने निष्कर्षों के समर्थन में देखा. संस्थाओं के पंजीकृत कार्यालयों के निरीक्षण में भी कथित तौर पर ऐसी गतिविधियों के संकेत मिले, जिनसे उनके वास्तविक कारोबारी अस्तित्व पर सवाल उठे.

3 करोड़ से 4,925 करोड़ पहुंचा बाजार मूल्य

सेबी के आदेश में कंपनी के बाजार पूंजीकरण में आई असाधारण तेजी का भी उल्लेख है. जांच अवधि के दौरान धेनु बिल्डकॉन का बाजार मूल्य करीब 3 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,925 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. खास बात यह रही कि इस दौरान कंपनी के राजस्व और मुनाफे में अपेक्षाकृत मामूली बदलाव ही दर्ज हुआ.

नियामक का आरोप है कि कंपनी के कथित कर्ज को इक्विटी में बदलने की प्रक्रिया ने शेयर मूल्य और बाजार पूंजीकरण को बढ़ाने में भूमिका निभाई. सेबी के मुताबिक, अगर शेयर बिना वास्तविक वित्तीय भुगतान के जारी किए गए थे और बाद में बाजार में बेचे गए, तो उनसे जुड़े पक्षों को अनुचित लाभ मिल सकता था. इसी पहलू ने जांच को और गंभीर बना दिया.

सेबी ने छह पर लगाई पाबंदी

मामले में सेबी ने छह व्यक्तियों और संस्थाओं को धेनु बिल्डकॉन के शेयरों में लेनदेन करने से रोक दिया है. कंपनी पर भी कॉरपोरेट कार्रवाई करने पर रोक लगाई गई है. सुरेंद्र कुमार जैन और वीरेंद्र जैन को प्रतिभूति बाजार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खरीद-बिक्री करने और बाजार से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने से प्रतिबंधित किया गया है.

नियामक ने स्टॉक एक्सचेंजों को संबंधित पक्षों के अनुपालन की जांच करने का निर्देश भी दिया है. सेबी ने स्पष्ट किया है कि उसके निष्कर्ष अंतरिम आदेश में दर्ज प्रारंभिक आरोपों और जांच पर आधारित हैं. आगे की प्रक्रिया में संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा.