रिटायरमेंट के बाद नियमित आय बनाए रखने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS एक लोकप्रिय विकल्प है. यह लंबी अवधि की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसे पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी PFRDA रेगुलेट करती है. इसमें निवेश की रकम अलग-अलग एसेट क्लास में लगाई जाती है.
अगर कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र में NPS में निवेश शुरू करता है और 60 साल तक यानी 35 वर्षों तक निवेश करता है, तो लंबी अवधि में बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाया जा सकता है. दिए गए अनुमान के मुताबिक करीब 14,000-15,000 रुपये का मासिक निवेश 10 फीसदी औसत वार्षिक रिटर्न की धारणा पर लगभग 5 करोड़ रुपये का कॉर्पस तैयार कर सकता है.
NPS के मौजूदा नियमों के तहत सामान्य निकासी के समय कॉर्पस का अधिकतम 60 फीसदी हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है. इस उदाहरण में 5 करोड़ रुपये के कॉर्पस पर यह रकम करीब 3 करोड़ रुपये होगी. वहीं, कम से कम 40 फीसदी हिस्से का उपयोग एन्युटी खरीदने में किया जाता है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है.
अगर 2 करोड़ रुपये एन्युटी में लगाए जाएं और एन्युटी से करीब 6 फीसदी सालाना आय मानें, तो इससे लगभग 12 लाख रुपये सालाना यानी करीब 1 लाख रुपये मासिक आय बनती है. इसलिए 50 हजार रुपये मासिक पेंशन का दावा हर व्यक्ति के लिए निश्चित नहीं माना जा सकता. वास्तविक पेंशन एन्युटी प्लान, दरों और उस समय के नियमों पर निर्भर करेगी.
NPS में निवेशक की पसंद के अनुसार इक्विटी, सरकारी सिक्योरिटीज और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे विकल्पों में पैसा लगाया जाता है. इक्विटी का हिस्सा अधिक होने पर लंबी अवधि में रिटर्न की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन बाजार जोखिम भी रहता है. इसलिए NPS को निश्चित रिटर्न वाली सरकारी पेंशन योजना समझना सही नहीं है.
NPS में निवेश पर लागू आयकर नियमों के अनुसार कुछ परिस्थितियों में टैक्स लाभ मिल सकता है. खाता ऑनलाइन eNPS प्लेटफॉर्म या अधिकृत Point of Presence के जरिए खोला जा सकता है. KYC के लिए PAN, Aadhaar, मोबाइल नंबर, बैंक विवरण और अन्य जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है. पात्र भारतीय नागरिक NPS में खाता खोल सकते हैं.