नई दिल्ली: नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के साथ 1 अप्रैल से नया आयकर अधिनियम लागू हो गया है. वेतनभोगी कर्मचारियों, खासकर पुरानी कर व्यवस्था चुनने वालों के लिए यह बदलाव मिश्रित प्रभाव वाला साबित हो सकता है. कंपनियां अब टैक्स छूट के नए नियमों के अनुसार भत्ते और सुविधाएं तय कर रही हैं. कुछ जगहों पर राहत मिली है तो कुछ में अतिरिक्त टैक्स बोझ भी बढ़ा है. इससे कर्मचारियों की मासिक सैलरी का नेट अमाउंट प्रभावित होगा.
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिलेगा जिनके बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. साथ ही बड़े शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को भी हाउस रेंट अलाउंस में बेहतर छूट मिल सकेगी. हालांकि कंपनी द्वारा दी जाने वाली कुछ सुविधाओं पर टैक्स बढ़ने से कुछ लोगों की सालाना टैक्स योग्य आय बढ़ सकती है.
नए नियमों के तहत बच्चों की शिक्षा भत्ते को प्रति बच्चा 100 रुपये मासिक से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है. इसी तरह हॉस्टल खर्च भत्ते को 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है. इससे दो बच्चों वाले परिवारों को काफी फायदा होगा और उनकी टैक्स योग्य आय कम हो सकेगी.
मकान किराया भत्ता (HRA) की 50% छूट अब अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में भी लागू होगी. पहले यह सुविधा सिर्फ दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता तक सीमित थी. इससे इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को किराए पर ज्यादा राहत मिलेगी.
कॉर्पोरेट भोजन कार्ड पर छूट अब 50 रुपये से बढ़कर 200 रुपये प्रति भोजन हो गई है. गिफ्ट कार्ड या कूपन पर सालाना छूट 15,000 रुपये तक बढ़ाई गई है. ट्रांसपोर्ट सेक्टर के कर्मचारियों को मिलने वाला भत्ता भी 25,000 रुपये या 70% तक कर मुक्त कर दिया गया है.
2 लाख रुपये तक के छोटे कॉर्पोरेट लोन अब टैक्स फ्री रहेंगे. चिकित्सा आपात स्थिति के लोन पर भी छूट बनी रहेगी. लेकिन कंपनी कार के निजी उपयोग पर टैक्स बढ़ गया है. 1.6 लीटर तक इंजन वाली कार पर 8,000 रुपये और बड़ी कार पर 10,000 रुपये मासिक टैक्स लगेगा.