Share Market: जून माह में भारतीय शेयर बाजार में एक से बढ़कर एक IPO (Initial Public Offering) का आगमन होने की संभावना है. अनुमान के अनुसार, इस महीने 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक का पूंजी जुटाने के लिए आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियां अपनी IPO लॉन्च करेंगी. ये आईपीओ निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकते हैं, लेकिन कुछ कंपनियों को कम प्रतिक्रिया भी मिल सकती है.
मार्केट सूत्रों के अनुसार, जून में विभिन्न साइज के मुख्य बोर्ड आईपीओ लॉन्च होंगे. इन आईपीओs में बड़े और मंझले आकार की कंपनियों के शेयर शामिल होंगे. कंपनियों की सूची में श्री लोटस डेवलपर्स & रियल्टी (800 करोड़ रुपये), ट्रैवल फूड सर्विसेज (2,000 करोड़ रुपये), लक्ष्मी इंडिया फाइनेंस (200 करोड़ रुपये), इंडोगल्फ क्रॉप्ससाइंसेस (300 करोड़ रुपये) और एनएसडीएल (3,000 करोड़ रुपये) शामिल हैं.
आईपीओ के प्रति निवेशकों का मिला-जुला रुझान
हालांकि, मई माह के कुछ आईपीओ में निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत फीका रहा है. विशेष रूप से खुदरा और उच्च निवल संपत्ति वाले निवेशकों (HNI) की ओर से कमजोर प्रतिक्रिया देखने को मिली. उदाहरण के तौर पर, "श्लॉस बैंगलोर" आईपीओ, जो कि लीला होटलों का मालिक है, में खुदरा खंड को केवल 60 प्रतिशत ही सब्सक्राइब किया गया था, जबकि उच्च निवल संपत्ति वाले निवेशकों का सब्सक्रिप्शन मात्र 43 प्रतिशत था, जबकि संस्थागत खंड ने 5.5 गुना सब्सक्राइब किया था.
इसी तरह, एगिस वोपाक टर्मिनल्स का आईपीओ भी आज बंद होने जा रहा है. इसमें खुदरा निवेशकों का सब्सक्रिप्शन 65 प्रतिशत और HNI का 39 प्रतिशत था.
आईपीओ बाजार में असमान प्रतिक्रिया
हालांकि इस महीने के शुरुआती आईपीओs में कुछ कंपनियों को शानदार प्रतिक्रिया मिली थी. उदाहरण के लिए, "बोराना वीव्स" आईपीओ को करीब 148 गुना और "बेलराइज इंडस्ट्रीज" आईपीओ को 43 गुना सब्सक्राइब किया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया आईपीओs में खुदरा और HNI निवेशकों की कम रुचि का कारण एक साथ कई आईपीओ का लॉन्च होना है. जब एक साथ कई आईपीओ आते हैं, तो निवेशकों का ध्यान बंट जाता है, जिससे प्रत्येक आईपीओ को कम सब्सक्रिप्शन मिलता है.
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
आईपीओ में निवेश करने वाले निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले, आईपीओ की प्रतिक्रिया और मार्केट की परिस्थितियों को समझना जरूरी है. अगर आईपीओ के प्रति निवेशकों का रुझान नकारात्मक है, तो उसका असर इसके सब्सक्रिप्शन और बाद में लिस्टिंग प्राइस पर पड़ सकता है. दूसरी बात, किसी आईपीओ में निवेश करने से पहले उस कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य के विकास के अवसरों का अध्ययन करना जरूरी है.