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India Daily

OECD की बड़ी भविष्यवाणी: दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत, अगले तीन साल मजबूत रहेगी GDP

OECD की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार भारत 2025-28 के दौरान दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत रहने का अनुमान है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
OECD की बड़ी भविष्यवाणी: दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत, अगले तीन साल मजबूत रहेगी GDP
Courtesy: ANI

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) ने अपनी अंतरिम आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक अनुमान जताया है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत 2025-26 में 7.6 प्रतिशत, 2026-27 में 6.1 प्रतिशत और 2027-28 में 6.4 प्रतिशत की GDP वृद्धि दर्ज कर सकता है. इन अनुमानों के साथ भारत लगातार दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा.

वैश्विक संकट के बीच भी भारत की मजबूत स्थिति

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती की परीक्षा ले रहा है. होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने से तेल एवं ऊर्जा की कीमतों में तेज़ उछाल आया है. इससे उर्वरकों सहित कई जरूरी वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके कारण लागत बढ़ रही है और महंगाई पर दबाव बना हुआ है.

चीन की विकास रफ्तार में आएगी नरमी

OECD का अनुमान है कि चीन की आर्थिक वृद्धि आने वाले वर्षों में धीमी होगी. रिपोर्ट के अनुसार चीन की GDP वृद्धि 2025 में 5 प्रतिशत रहने के बाद 2026 में घटकर 4.4 प्रतिशत और 2027 में 4.3 प्रतिशत रह सकती है. उपभोक्ता सब्सिडी समाप्त होने, ऊर्जा आयात महंगा होने, रियल एस्टेट क्षेत्र में जारी समायोजन और निवेश की रफ्तार कमजोर पड़ने को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है.

दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बनी रहेगी अनिश्चितता

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक GDP वृद्धि 2026 में 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2027 में यह बढ़कर 3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. प्रौद्योगिकी आधारित निवेश और प्रभावी टैरिफ दरों में धीरे-धीरे कमी से वैश्विक विकास को सहारा मिलने की उम्मीद है. हालांकि पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट वैश्विक मांग और निवेश के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है.

ऊर्जा बाजार सामान्य होने की उम्मीद

OECD ने अपनी भविष्यवाणी इस धारणा पर आधारित की है कि ऊर्जा बाजार में मौजूदा व्यवधान अस्थायी रहेगा और 2026 के मध्य से ऊर्जा कीमतों में धीरे-धीरे नरमी आएगी. यदि ऐसा होता है तो वैश्विक महंगाई पर दबाव कम होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी. ऐसे माहौल में भारत की मजबूत घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक सुधार उसे अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकते हैं.