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India Daily

सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोल निर्यात पर एक्साइज ड्यूटी खत्म, डीजल और ATF पर बढ़ाया शुल्क

 केंद्र सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगने वाला विशेष शुल्क खत्म कर दिया है.  वहीं, डीजल पर शुल्क बढ़ाकर 11.5 रुपये और ATF पर 11 रुपये प्रति लीटर किया है. 

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोल निर्यात पर एक्साइज ड्यूटी खत्म, डीजल और ATF पर बढ़ाया शुल्क
Courtesy: pinterest

केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है.  वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नई अधिसूचनाओं के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) पूरी तरह खत्म कर दिया गया है.  पहले यह शुल्क 2.5 रुपये प्रति लीटर था. 

डीजल निर्यात पर 3 रुपये बढ़ा शुल्क

सरकार ने पेट्रोल पर शुल्क खत्म करने के साथ ही डीजल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क बढ़ा दिया है.  हाई-स्पीड डीजल पर SAED को 8.5 रुपये से बढ़ाकर 11.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.  यानी इसमें 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. 

 ATF पर भी बढ़ाया गया एक्साइज ड्यूटी

हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर भी शुल्क बढ़ाया गया है.  वित्त मंत्रालय की अधिसूचना संख्या 56/2026-Central Excise के अनुसार, ATF पर शुल्क 10.5 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.  इस तरह सरकार ने पेट्रोल पर शुल्क शून्य कर दिया है, जबकि डीजल और विमान ईंधन पर इसे बढ़ाया है. 

 31 अक्टूबर से लागू हुई नई दरें

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने इन बदलावों को लेकर अधिसूचनाएं जारी की हैं.  नई दरें 31 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही लागू हो गई हैं.  इससे पहले 16 अक्टूबर को सरकार ने पेट्रोल पर 2.5 रुपये, डीजल पर 8.5 रुपये और ATF पर 10.5 रुपये प्रति लीटर निर्यात शुल्क तय किया था. 

सरकार ने क्यों लगाया था निर्यात शुल्क?

केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच 27 मार्च 2026 को पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष शुल्क लगाया था. 

इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना था.  सरकार को आशंका थी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में कंपनियां घरेलू बाजार के बजाय विदेशों में अधिक ईंधन बेच सकती हैं.  निर्यात शुल्क लगाकर सरकार घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध रखना चाहती थी. 

हर 15 दिन में शुल्क की समीक्षा

सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले निर्यात शुल्क की हर 15 दिन में समीक्षा करती है.  इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन की औसत कीमतों को आधार बनाया जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों और मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार सरकार शुल्क में बदलाव करती है.  31 अक्टूबर को किया गया ताजा बदलाव भी इसी समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है.