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सोना सस्ता होने के बावजूद लोग क्यों बेच रहे अपने पुराने गहने? भारतीयों ने करीब 50 टन पुराना सोना किया सेल

सोने के दाम 1.8 लाख रुपये से गिरकर 1.4 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम होने पर भारतीय परिवार नुकसान के डर से पुराने गहने बेचकर कैश कमा रहे हैं. इससे देश में गोल्ड रीसाइक्लिंग बढ़ी है और इम्पोर्ट पर निर्भरता घटेगी.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
सोना सस्ता होने के बावजूद लोग क्यों बेच रहे अपने पुराने गहने? भारतीयों ने करीब 50 टन पुराना सोना किया सेल
Courtesy: ai generated

आजकल भारतीय परिवारों में अपने पुराने सोने और गहनों को बेचकर कैश कमाने की एक नई होड़ देखने को मिल रही है. लोगों को डर है कि सोने के दाम अपने सबसे ऊंचे स्तर को छू चुके हैं और अब इनमें बड़ी गिरावट आ सकती है. इसी नुकसान से बचने के लिए लोग समय रहते मुनाफा कमा लेना चाहते हैं.

क्या हैं इसके मुख्य कारण?

गिरावट का डर: इस साल की शुरुआत में सोना करीब 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था जो बाद में गिरकर 1.4 लाख रुपये पर आ गया. अब बाजार के जानकारों और आम लोगों को डर है कि यह और गिरकर 1.2 लाख रुपये तक आ सकता है.

एक्सचेंज के बजाय कैश को तवज्जो: इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के मुताबिक, लोग पुराने गहनों के बदले नए गहने खरीदने के बजाय सीधे उन्हें बेचकर कैश हाथ में रखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

बिक्री में भारी उछाल: अप्रैल से जून की तिमाही में ही भारतीयों ने करीब 50 टन पुराना सोना बेच डाला, जो पिछले साल के इसी समय के मुकाबले 43% ज्यादा है.

सोने की रीसाइक्लिंग का बढ़ता कारोबार

भारत अपनी सोने की जरूरतों के लिए ज्यादातर दूसरे देशों से होने वाले इम्पोर्ट पर निर्भर रहता है. वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने लगभग 72.4 बिलियन डॉलर का सोना बाहर से मंगवाया. ऐसे में घर में रखे पुराने सोने का बाजार में आना देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है.

इम्पोर्ट पर निर्भरता होगी कम: अनुमान है कि जहां 2025 में पुराने सोने को गलाकर नया बनाना वाला सोना 125-150 टन था, वहीं 2026 में यह बढ़कर 200-250 टन तक पहुंच सकता है.

कंपनियों की चांदी: पुराना सोना खरीदने वाली कंपनियों जैसे 'मुथूट एक्जिम' और 'ऑगमॉन्ट' के बिजनेस में भारी तेजी देखी जा रही है. मुथूट एक्जिम के कलेक्शन में 40% की बढ़ोतरी हुई है. ये कंपनियां लोगों से पुराना सोना पारदर्शी तरीके से खरीदती हैं, उसे गलाकर 24-कैरेट शुद्ध सोना बनाती हैं और फिर से ज्वैलर्स को सप्लाई कर देती हैं.

एक दिलचस्प आंकड़ा: भारतीय परिवारों के पास करीब 30,000 टन सोना जमा है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर लोग इस घरों में बंद पड़े सोने को बाजार में लाते हैं, तो भारत को बाहर से सोना कम खरीदना पड़ेगा और देश का पैसा देश में ही रहेगा.