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India Daily

फ्यूल संकट में बड़ी राहत! सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर घटाई एक्साइज ड्यूटी, जानें कितनी हुई कटौती

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी घटा दी है, जिससे ईंधन के दाम कम होने की उम्मीद है, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतें अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
फ्यूल संकट में बड़ी राहत! सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर घटाई एक्साइज ड्यूटी, जानें कितनी हुई कटौती
Courtesy: grok

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार को जोरदार झटका दिया है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और इसका सीधा असर भारत की फ्यूल कंपनियों पर पड़ा है. ऐसे माहौल में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की है. इस कदम से देशभर में ईंधन के दाम घटने की उम्मीद बढ़ गई है. हालांकि वैश्विक सप्लाई की अनिश्चितता बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है.

एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती

सरकार ने पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दी है. वहीं डीजल पर यह ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर पूरी तरह समाप्त कर दी गई है. ड्यूटी में इस कमी से आम उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिलने की संभावना है. सरकारी अनुमान है कि कंपनियां इस कटौती को कीमतों में शामिल करेंगी और पंपों पर दरें नीचे आएंगी.

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाया दबाव

पश्चिम एशिया में जंग के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे कीमतों में तेज उछाल देखा गया. हाल ही में ब्रेंट फ्यूचर्स में 5.7% और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में 4.6% की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी. महंगा कच्चा तेल खरीदने की मजबूरी ने भारतीय फ्यूल कंपनियों पर भारी दबाव बना दिया. इसी कारण कुछ निजी कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए.

निजी और सरकारी कंपनियों की अलग स्थिति

नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपये और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए. लेकिन सरकारी OMCs, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने सामान्य पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं. हालांकि प्रीमियम पेट्रोल व इंडस्ट्रियल डीजल महंगा हो गया है. इन सरकारी कंपनियों के पास देश का लगभग 90% फ्यूल बाजार है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्की गिरावट

अमेरिका के ईरान के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले 10 दिनों के लिए रोकने के फैसले के बाद कच्चे तेल में हल्की गिरावट दर्ज हुई. ब्रेंट फ्यूचर्स 0.8% गिरकर 107.11 डॉलर प्रति बैरल और WTI 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि जब तक संघर्ष जारी रहेगा, कीमतें अस्थिर रह सकती हैं.

भारत की निर्भरता और रास्ते की चुनौती

भारत अपनी तेल जरूरतों का 88% आयात करता है, जिनमें से बड़ी मात्रा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरती है. संघर्ष बढ़ने के बाद ईरान ने इस मार्ग पर नियंत्रण मजबूत कर दिया और व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी. हालांकि उसने भारत जैसे ‘फ्रेंडली देशों’ के लिए कुछ शर्तों के साथ रास्ता खोलने की बात कही है. इससे भी बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है.