कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के नियमों में 2026 के दौरान कई अहम बदलाव सामने आए हैं. इनका मकसद पीएफ से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान और डिजिटल बनाना है. हालांकि निकासी और बेरोजगारी के बाद रकम निकालने की शर्तों में बदलाव से कर्मचारियों को अपने भविष्य के वित्तीय फैसलों में नई योजना बनानी पड़ सकती है.
पीएफ में कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान की मूल दर 12 प्रतिशत पर कायम बताई गई है. 15 हजार रुपये तक के मासिक मूल वेतन वाले कर्मचारियों के लिए न्यूनतम योगदान 1,800 रुपये रहेगा. इससे अधिक योगदान करना कर्मचारी की इच्छा पर निर्भर होगा.
वहीं नई व्यवस्था में वेतन सीमा को भविष्य में बदलने के लिए नियमों को अधिक लचीला बनाया गया है. पहले 15 हजार रुपये की सीमा का सीधा उल्लेख था, जबकि अब केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित वेतन सीमा का प्रावधान रखा गया है. इससे आगे चलकर सीमा में बदलाव करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है.
ईपीएफओ ने आंशिक निकासी से जुड़े कई अलग-अलग प्रावधानों को सरल बनाने की दिशा में बदलाव किया है. अब पात्र निकासी को मुख्य रूप से आपात स्थिति, आवास और विशेष जरूरतों जैसी तीन व्यापक श्रेणियों में रखा गया है. इससे अलग-अलग परिस्थितियों के लिए मौजूद जटिल शर्तों को समझना आसान हो सकता है.
खाते में जमा राशि के इस्तेमाल को लेकर भी नई संरचना बताई गई है. इसके तहत कम से कम 25 प्रतिशत रकम खाते में सुरक्षित रखी जाएगी, जबकि निर्धारित शर्तों के तहत अधिकतम 75 प्रतिशत राशि पात्र आंशिक निकासी में इस्तेमाल की जा सकेगी.
निकासी के लिए सामान्य रूप से 12 महीने की सेवा पूरी करने की शर्त लागू की गई है. चिकित्सा कारणों से निकासी के मामले में भी 12 महीने की सेवा का प्रावधान बताया गया है. इसके साथ ही क्लेम निपटाने की समय सीमा 20 दिन किए जाने की बात कही गई है. वैध वजह के बिना देरी होने पर 12 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज की व्यवस्था भी बताई गई है. नामांकन प्रक्रिया में कागजी प्रक्रिया को धीरे-धीरे हटाकर ऑनलाइन नामांकन को महत्व दिया गया है. इससे सदस्यों को दस्तावेजी प्रक्रिया कम करनी पड़ेगी और रिकॉर्ड डिजिटल रूप से संभाले जा सकेंगे.
नए नियमों में नौकरी छोड़ने के बाद पूरी पीएफ राशि निकालने की समयसीमा में बड़ा बदलाव बताया गया है. पहले दो महीने तक बेरोजगार रहने के बाद पूरी राशि निकालने का विकल्प उपलब्ध था, जबकि नई व्यवस्था के अनुसार पूर्ण निकासी के लिए 12 महीने की बेरोजगारी पूरी करनी होगी.
आंशिक निकासी की सुविधा बनी रहेगी, लेकिन इसके लिए भी प्रतीक्षा अवधि बढ़ाकर 36 महीने किए जाने की बात कही गई है. इसका मतलब है कि नौकरी बदलने या रोजगार में अस्थायी रुकावट आने पर कर्मचारियों को पीएफ राशि निकालने से पहले पहले की तुलना में अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है.