menu-icon
India Daily

दिल्ली-NCR में घर खरीदना हुआ मुश्किल, 1 करोड़ का बजट भी पड़ रहा कम; जानें कितनी सैलरी पर खरीदें घर

दिल्ली-NCR में तेजी से बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ा दी है. 1 करोड़ रुपये का बजट भी अब गुरुग्राम और दिल्ली में अच्छा घर दिलाने के लिए नाकाफी साबित हो रहा है. जानें कितनी सैलरी पर घर खरीदना सही फैसला है.

Dhiraj Kumar Dhillon
दिल्ली-NCR में घर खरीदना हुआ मुश्किल, 1 करोड़ का बजट भी पड़ रहा कम; जानें कितनी सैलरी पर खरीदें घर
Courtesy: Social Media

दिल्ली-एनसीआर का रीयल एस्टेट मार्केट अब मिडिल क्लास खरीदारों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. जो घर कुछ साल पहले तक किफायती माने जाते थे, अब उनकी कीमतें आम नौकरी पेशा लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रहा है. हालात ऐसे हैं कि आज एक करोड़ रुपये का बजट भी दिल्ली-एनसीआर के अच्छे इलाकोंं में घर खरीदने के लिए कम पड़ने लगा है. जानकारों का कहना है कि प्रोपर्टी की कीमतों में तेजी से हुई बढोतरी ने लोगों की आय और घरों की लागत के बीच बड़ा अंतर पैदा कर दिया है. जमीन की बढ़ती कीमतें, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और प्रीमियम हाउसिंग की मांग ने एनसीआर में प्रोपर्टी बाजार को महंगा बना दिया है.

सालाना आय से पांच गुने से ज्यादा न हो घर का बजट 

सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकार और सहज मनी के संस्थापक अभिषेक कुमार के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को अपनी सालाना आय के चार से पांच गुना बजट तक का ही घर खरीदना चाहिए. यानी 10 लाख रुपये की सालाना आय वाले व्यक्ति को 40 से 50 लाख तक का घर खरीदना चाहिए. जिन लोगों की आय 20 लाख रुपये सालाना है, वे 80 लाख से एक करोड़ तक का घर खरीद सकते हैं. यह बजट उनके लिए सुरक्षित माना जाता है.

हालांकि बाजार में एक करोड़ रुपये का बजट भी खरीदारों को गुरुग्राम और दिल्ली के प्राइम इलाकों से दूर कर ग्रेटर नोएडा वेस्ट, न्यू गुरुग्राम, फरीदाबाद और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे उभरते क्षेत्रों की ओर जाने को मजबूर करता है.

कैश इन हैंड सेलरी की 35 परसेंट से ज्यादा न हो EMI

रियल एस्टेट कंपनी ओमैक्स के एमडी मोहित गोयल का कहना है कि गुरुग्राम और दिल्ली के प्रमुख बाजारों में अब दो से तीन करोड़ रुपये प्रीमियम हाउसिंग की शुरूआती कीमत बनती जा रही है. जानकार सलाह दे रहे हैं कि होम लोन की ईएमआई मासिक इन हैंड सेलरी की 30 से 35 परसेंट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. बढ़ती ईएमआई और महंगी जीवनशैली के बीच तालमेल बैठाना अबग मिडिल क्लास परिवारों के लिए ‌कठित होता जा रहा है. ऐसे में पेशेवरों के लिए घर खरीदने की बजाय किराए पर रहना ज्यादा व्यवहारिक विकल्प बनता जा रहा है, क्योंकि एनसीआर में किराया अभी भी होम लोन ईएमआई की तुलना में काफी सस्ता माना जा रहा है.