नई दिल्ली: दुनिया में अक्सर कंपनियों की बिक्री से मालिकों को बड़ा फायदा होता है, लेकिन बहुत कम मामलों में कर्मचारी भी उस सफलता का हिस्सा बन पाते हैं. अमेरिका में एक कारोबारी ने ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है. लुइसियाना के व्यवसायी ग्राहम वॉकर ने अपनी पारिवारिक कंपनी बेचने के बाद कर्मचारियों को भारी रकम उपहार के रूप में दी. इस फैसले ने लोगों को हैरान करने के साथ-साथ भावुक भी कर दिया है.
ग्राहम वॉकर ने अपनी कंपनी बेचने से पहले ही एक महत्वपूर्ण शर्त रखी थी. उन्होंने तय किया कि बिक्री से मिलने वाली राशि का 15 प्रतिशत हिस्सा उन कर्मचारियों को दिया जाएगा, जिनके पास कंपनी की हिस्सेदारी नहीं है. आमतौर पर ऐसे सौदों में केवल निवेशकों और शेयरधारकों को लाभ मिलता है, लेकिन इस बार कर्मचारियों को भी सफलता का भागीदार बनाया गया.
कंपनी बिक्री के बाद कुल 240 मिलियन डॉलर कर्मचारियों में बांटे गए. यह रकम भारतीय मुद्रा में करीब 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक बैठती है. औसतन हर कर्मचारी को लगभग 4 करोड़ रुपये मिले. इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग ग्राहम वॉकर की सोच और उदारता की जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई लोगों ने इसे कर्मचारियों के सम्मान का सबसे बड़ा उदाहरण बताया.
ग्राहम वॉकर अमेरिकी कंपनी Fibrebond Corp के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे. यह कंपनी मॉड्यूलर पावर एनक्लोजर बनाने का काम करती थी. कंपनी को Eaton Corporation ने खरीदा. यह सौदा 1 अप्रैल 2025 को पूरा हुआ था. इस डील से ग्राहम वॉकर को करीब 16 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए. हालांकि उन्होंने इस बड़ी रकम का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के लिए अलग रखने का फैसला किया.
कर्मचारियों को मिलने वाली यह रकम एक साथ नहीं दी जाएगी. इसे पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से बांटा जाएगा. इसके साथ रिटेंशन क्लॉज भी जोड़ा गया है. यानी कर्मचारियों को पूरी राशि पाने के लिए कंपनी में बने रहना होगा. हालांकि 65 वर्ष से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों को इस शर्त से राहत दी गई है, ताकि वे सम्मानपूर्वक रिटायर हो सकें.
जब ग्राहम वॉकर से पूछा गया कि उन्होंने 15 प्रतिशत हिस्सा ही क्यों तय किया, तो उनका जवाब बेहद सरल था. उन्होंने कहा कि यह 10 प्रतिशत से ज्यादा है. उनका यह छोटा सा जवाब अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. लोग इसे एक सफल कारोबारी की इंसानियत और कर्मचारियों के प्रति सम्मान की मिसाल मान रहे हैं.