मर्सिडीज-बेंज ने पेश किया हाइड्रोजन से चलने वाला NextGenH2 ट्रक, खासियत जानकर उड़ जाएंगे होश

मर्सिडीज-बेंज ने हाइड्रोजन से चलने वाला NextGenH2 ट्रक पेश किया है, जिसे लंबी दूरी की भारी माल ढुलाई के लिए तैयार किया गया है. यह ट्रक एक बार हाइड्रोजन भरने पर करीब 1000 किलोमीटर तक चल सकता है और पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: भारी वाहनों के भविष्य को बदलने की दिशा में मर्सिडीज-बेंज ने बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने हाइड्रोजन से चलने वाला NextGenH2 ट्रक पेश किया है, जो डीजल ट्रकों का विकल्प बनने की तैयारी में है.

डायमलर ट्रक द्वारा पुष्टि किए गए इस मॉडल को खास तौर पर लंबी दूरी की ढुलाई के लिए तैयार किया गया है, जहां इलेक्ट्रिक ट्रकों की सीमित रेंज चुनौती बन जाती है.

लंबी दूरी की जरूरतों के लिए तैयार ट्रक

NextGenH2 ट्रक की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी रेंज है. एक बार हाइड्रोजन भरने पर यह करीब 1000 किलोमीटर तक बिना रुके चल सकता है. यह दूरी पारंपरिक डीजल ट्रकों के बराबर मानी जा रही है. कंपनी का कहना है कि यह ट्रक उन रूट्स के लिए बनाया गया है, जहां बार-बार चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होती.

तेज रिफ्यूलिंग और दमदार पावर

इस ट्रक में हाइड्रोजन भरने में केवल 10 से 15 मिनट का समय लगता है, जो इसे व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए बेहद उपयोगी बनाता है. इसमें दो फ्यूल सेल यूनिट दी गई हैं, जो 402 से 496 हॉर्सपावर तक की ताकत पैदा करती हैं. भारी वजन के साथ भी यह ट्रक पहाड़ी इलाकों में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है.

हाइड्रोजन तकनीक कैसे करती है काम

NextGenH2 में लिक्विड हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया गया है, जिसे बेहद कम तापमान पर स्टोर किया जाता है. इससे कम जगह में ज्यादा ईंधन रखा जा सकता है. फ्यूल सेल तकनीक के जरिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली बनाई जाती है, जिससे ट्रक की मोटर चलती है.

बैटरी बैकअप और स्मार्ट सिस्टम

इस ट्रक में 101 kWh की बैटरी भी दी गई है, जो रीजेनरेटिव ब्रेकिंग के दौरान चार्ज होती है. ब्रेक लगाने पर बनने वाली ऊर्जा को यह बैटरी स्टोर करती है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पावर देती है. इससे ड्राइविंग और ज्यादा स्मूद हो जाती है.

टेस्टिंग, सुरक्षा और भविष्य की योजना

मर्सिडीज ने इस ट्रक को स्विस आल्प्स में कड़ी ठंड और गर्मी दोनों हालात में टेस्ट किया है. एक परीक्षण में यह 20,000 किलो वजन के साथ 1000 किलोमीटर से ज्यादा चला. जर्मनी सरकार इस प्रोजेक्ट को लगभग 244 मिलियन डॉलर की मदद दे रही है. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करना है.