नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. इस बहुप्रतीक्षित समझौते के तहत भारत यूरोप से आयात होने वाली लग्जरी कारों पर भारी टैरिफ में बड़ी कटौती करने की तैयारी में है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह डील दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा दे सकती है और ऑटोमोबाइल सेक्टर इसका सबसे बड़ा लाभार्थी बन सकता है.
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मर्सिडीज-बेंज, BMW और वोक्सवैगन जैसी यूरोपीय कार कंपनियों को भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिल सकती है. सरकार ने महंगी कारों पर तत्काल टैक्स कटौती के संकेत दिए हैं, जबकि घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को फिलहाल बाहर रखा गया है. यदि यह समझौता लागू होता है, तो भारत के ऑटो सेक्टर और भारत-EU व्यापार संबंधों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
भारत सरकार और यूरोपीय संघ के बीच दशकों से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है. इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है और इसका औपचारिक ऐलान 27 जनवरी 2026 को होने की संभावना है. डील का मकसद दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है, जिसमें ऑटोमोबाइल सेक्टर सबसे अहम माना जा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार भारत ने EU से आयात होने वाली कारों पर लगने वाले टैरिफ को 110 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है. इतना ही नहीं, आने वाले समय में इस शुल्क को और कम करके 10 प्रतिशत तक लाने का विकल्प भी खुला रखा गया है. यह फैसला भारत के ऑटो आयात ढांचे में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 15,000 यूरो से अधिक कीमत वाली कारों पर तत्काल टैक्स कटौती के लिए तैयार हो गई है. भारतीय मुद्रा में यह कीमत लगभग 13.5 लाख रुपये से ऊपर बैठती है. इस कदम से वोक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसी यूरोपीय कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश और विस्तार आसान हो जाएगा.
घरेलू उद्योग के हितों को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों को शुरुआती पांच वर्षों के लिए इस टैरिफ कटौती से बाहर रखा गया है. सरकार का मानना है कि इससे देश में EV मैन्युफैक्चरिंग को संरक्षण मिलेगा. फिलहाल भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन यहां आयात शुल्क वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक EU के 27 देशों से आयात होने वाली चुनिंदा कारों पर ड्यूटी में कटौती तभी लागू होगी, जब उनकी इम्पोर्ट कीमत लगभग 17,739 अमेरिकी डॉलर से अधिक होगी. भारत पूरी तरह से बनी कारों पर ऊंची ड्यूटी लगाकर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देता रहा है, ऐसे में यह बदलाव ऑटो सेक्टर और भारत-EU व्यापार संबंधों पर दूरगामी असर डाल सकता है.