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शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है जल-दूध? जानें इसका महत्व

आज सावन की शिवरात्रि की है. इस दिन की गई शिव पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं. भगवान शिव को खासतौर पर ठंडक देने वाली चीजें जैसे जल, दूध, दही और घी चढ़ाने की परंपरा है. आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर जल और दूध क्यों चढ़ाए जाते हैं.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: आज सावन की शिवरात्रि की है. इस दिन की गई शिव पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं. अगर विधिवत पूरी पूजा नहीं कर पा रहे हैं तो सिर्फ जल और दूध चढ़ाकर भी सामान्य पूजा कर सकते हैं. शिवलिंग का जलाभिषेक करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. भगवान शिव को खासतौर पर ठंडक देने वाली चीजें जैसे जल, दूध, दही और घी चढ़ाने की परंपरा है.

सबसे पहले जानते हैं कि शिवजी पर किए जाने वाले अभिषेक का क्या मतलब होता है. अभिषेक का मतलब है शिवलिंग पर जल चढ़ाना. शिव जी का एक नाम रुद्र भी है, इसलिए जलाभिषेक को रुद्राभिषेक भी कहते हैं. आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर जल और दूध क्यों चढ़ाए जाते हैं.  

समुद्र मंथन की कथा:

पुराने समय में देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था. इस मंथन से 14 रत्न निकले. इनमें कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, ऐरावत हाथी, उच्चैःश्रवा घोड़ा, महालक्ष्मी, धन्वंतरि और अमृत कलश शामिल थे. लेकिन सबसे पहले हलाहल नाम का जहरीला विष निकला. इस विष से पूरी दुनिया के जीव खतरे में पड़ गए. सभी को बचाने के लिए भगवान शिव ने वह विष पी लिया. उन्होंने विष को गले से नीचे नहीं जाने दिया. गले में विष रहने से उनका गला नीला हो गया. इसी वजह से उनका एक नाम नीलकंठ पड़ा.


विष की वजह से शिव जी के शरीर में तेज जलन होने लगी. इस जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें शीतल जल अर्पित किया. तब से शिव जी को ठंडक पहुंचाने के लिए शिवलिंग पर ठंडी चीजें जैसे जल, दूध, दही और घी चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई. ठंडक के लिए ही शिव जी ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया है.  

जल-दूध चढ़ाते समय ध्यान रखने वाली बातें:

शिवलिंग पर जल सोने, चांदी, पीतल या तांबे के लोटे से चढ़ाना चाहिए. दूध के लिए चांदी का बर्तन बेहतर माना जाता है. चांदी का लोटा न हो तो मिट्टी के कलश से भी जल-दूध चढ़ा सकते हैं. स्टील, एल्युमिनियम या लोहे के बर्तन का इस्तेमाल न करें. ये धातुएं पूजा के लिए शुभ नहीं मानी जातीं. लोटे में जल या दूध भरें और पतली धारा के रूप में शिवलिंग पर चढ़ाएं. चढ़ाते समय ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें.