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शाम ढलते ही भूलकर भी न करें ये गलती! जानिए संध्या काल में सोना क्यों माना जाता है अशुभ?

वास्तु शास्त्र और हिंदू परंपराओं में संध्या काल को बेहद शुभ समय माना गया है. मान्यता है कि इस दौरान की गई अच्छी दिनचर्या घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जबकि कुछ आदतें नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकती हैं.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
शाम ढलते ही भूलकर भी न करें ये गलती! जानिए संध्या काल में सोना क्यों माना जाता है अशुभ?
Courtesy: Pinterest

सूर्यास्त के समय अक्सर बड़े-बुजुर्ग लोगों को सोने से मना करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे आखिर वजह क्या है? वास्तु शास्त्र और हिंदू परंपराओं में संध्या काल को बेहद शुभ समय माना गया है. मान्यता है कि इस दौरान की गई अच्छी दिनचर्या घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जबकि कुछ आदतें नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकती हैं. इन्हीं में से एक है सूर्यास्त के समय या उसके तुरंत बाद सोना.

वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिन और रात के मिलन का समय यानी संध्या काल आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होता है. इस समय भगवान की आराधना, दीपक जलाना और ध्यान करना शुभ माना जाता है. 

संध्या काल को क्यों माना जाता है शुभ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त के समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ज्यादा रहता है. इसलिए इस दौरान घर में दीपक जलाकर पूजा, आरती और मंत्र जाप करने की परंपरा है. माना जाता है कि इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है.

आलस्य बढ़ने की मान्यता

वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि सूर्यास्त के समय सोने की आदत व्यक्ति के स्वभाव पर असर डाल सकती है. मान्यता है कि इससे आलस्य बढ़ सकता है और काम में मन कम लगता. इससे उत्साह में भी कमी आ है.

मां लक्ष्मी के स्वागत का समय

धार्मिक परंपराओं के अनुसार संध्या का समय मां लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक माना जाता है. इसलिए इस समय घर की साफ-सफाई, दीपक जलाना और पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है, जबकि सोना उचित नहीं माना जाता.

शाम के समय क्या करना लाभकारी माना जाता है?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस समय भगवान का स्मरण, ध्यान, आरती, मंत्र जाप और परिवार के साथ सकारात्मक समय बिताना लाभकारी माना जाता है. इससे मानसिक शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है.

क्या सभी पर लागू होते हैं ये नियम?

विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्यास्त के बाद न सोने की सलाह धार्मिक और वास्तु मान्यताओं पर आधारित है. अगर किसी व्यक्ति की तबीयत खराब है, डॉक्टर ने आराम की सलाह दी है या उसकी कार्यशैली अलग है, तो वह अपनी शारीरिक आवश्यकता के अनुसार विश्राम कर सकता है. इसलिए स्वास्थ्य को हमेशा प्राथमिकता देना चाहिए.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.