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राजा जनक नहीं इनकी पुत्री थीं देवी सीता, बनी थीं पिता की मृत्यु का कारण!

Mata Sita: भगवान राम की पत्नी सीता को जानकी कहा जाता है. उनको राजा जनक की पुत्री माना जाता है. हालांकि राजा जनक को माता सीता एक कलश में मिली थीं. अद्भुत रामायण में सीता के असली पिता के बारे में जानकारी दी गई है. आइए जानते हैं कि माता सीता किसकी पुत्री थीं. 

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Courtesy: pexels

Mata Sita: भगवान श्रीराम की पत्नी माता सीता को लोग अधिकतर राजा जनक की पुत्री ही जानते हैं. महर्षि वाल्मीकि की रामायण के अनुसार एक बार मिथिला नगरी में अकाल पड़ गया था. इससे मुक्ति पाने के लिए ऋषियों ने राजा जनक से यज्ञ करवाने को कहा, जिससे वर्षा हो सके. यज्ञ की समाप्ति के बाद रिवाज के अनुसार राजा जनक को हल से खेत जोतना था. जब राजा जनक हल से खेत जोत रहे थे तो हल का नुकीला सिरा जिसे सीत कहा जाता है, किसी कठोर चीज से टकरा गया. इससे हल वहीं अटक गया. जब उस स्थान को खोदा गया तो वहां से एक कलश की प्राप्त हुई. 

राजा जनक ने जब इस कलश को खोला तो देखा कि उसमें एक सुंदर कन्या थी. राजा जनक ने कलश से निकली कन्या को अपनी पुत्री बना लिया. उस समय पर राजा जनक के कोई संतान भी नहीं थी. हल के नुकीले भाग सीत के टकराने से कलश मिला था. इस कारण उस कन्या का नाम सीता रख दिया गया, लेकिन सीता राजा जनक की पत्नी सुनयना के गर्भ से नहीं पैदा हुई थीं. 

किसकी पुत्री थीं देवी सीता?

देवी सीता के जन्म से  संबंधित एक कथा का वर्णन अद्भुत रामायण में है. इस रामायण के अनुसार, गृत्समद नाम के ऋषि देवी लक्ष्मी को अपनी पुत्री के रूप में पाना चाहते थे. इस कारण वे हर दिन यज्ञ और मंत्रोच्चार करने के बाद कुश के अग्र भाग से एक कलश में दूध की बूंदे डालते थे. एक दिन जब वे ऋषि आश्रम में नहीं थे तब वहां पर रावण आ पहुंचा और उसने वहां मौजूद ऋषियों को मार दिया और उनका रक्त उसी कलश में भर लिया.

इस कलश को रावण ने महल में लाकर छुपा दिया. रावण की पत्नी मंदोदरी ने उत्सुकतावश उस कलश को खोलकर देख लिया. उस समय रावण महल में नहीं था. रावण की पत्नी मंदोदरी उस कलश का रक्त पी गई, इससे वह गर्भवती हो गई. इससे मंदोदरी को एक कन्या की प्राप्ति हुई. यह भेद किसी को पता न चले, इस कारण मंदोदरी ने एक कलश में उस पुत्री को भरकर लंका से दूर एक भूमि में छिपा दिया. यह जगह मिथिला नगरी में थी. इस कारण सीता को रावण की पुत्री माना जाता है. मान्यता है कि रावण ने कहा था कि जब उसके हृदय में अपनी पुत्री से विवाह की इच्छा होगी तो यह उसकी मृत्यु का कारण बनेगा. 

वेदवती का अवतार थीं सीता

कुछ रामायणों में माता सीता को वेदवती का अवतार बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि वेदवती जब भगवान श्रीहरि विष्णु की उपासना कर रही थीं तो रावण उनकी सुंदरता पर मोहित हो गया. रावण ने वेदवती की भक्ति को बाधित करने का प्रयास किया. रावण से तंग आकर वेदवती ने खुद को अग्नि में भस्म कर लिया. उन्होंने अंतिम समय पर यह भी कहा था कि वह रावण के अंत का कारण बनेंगी. मान्यता है कि माता सीता देवी वेदवती का ही अवतार थीं. 

जैन रामायण में भी मिलता है उल्लेख 

जैन रामायण के अनुसार माता सीता रावण की असली पुत्री हैं. इसके अनुसार मंदोदरी को जब माता सीता संतान के रूप में प्राप्त हुईं तो रावण काफी खुश हुआ. तभी यह भविष्णयवाणी हुई कि यही पुत्री रावण के विनाश का कारण बनेगी तो उसने सीता को तुरंत कहीं दूर छोड़ने का आदेश दिया. इसके बाद रावण ने सीता को मिथिला में कलश के अंदर रखकर मिथिला में छिपा दिया था. इसके बाद वे राजा जनक को प्राप्त हो गई थीं. 

Disclaimer : यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.