वास्तु अनुसार किस दिशा में हो घर का मुख्य द्वार? इन नियमों से बढ़ेगी समृद्धि और दूर होंगी जीवन की बाधाएं

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार सिर्फ प्रवेश का मार्ग नहीं बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा आने का मुख्य स्रोत है.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: घर का मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यह न केवल घर में प्रवेश का मार्ग है, बल्कि घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के संतुलन को भी नियंत्रित करता है. सही दिशा, आकार, रंग और साफ-सफाई का ध्यान रखने से परिवार में सुख-शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है. वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि घर के मुख्य द्वार पर छोटी-छोटी गलतियां भी जीवन में बाधाएं उत्पन्न कर सकती हैं. मुख्य द्वार हमेशा घर के मुख्‍य प्रवेश द्वार के रूप में सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है.

इसे खोलते समय या प्रवेश करते समय घर में शांति और सकारात्मक वाइब्स का अनुभव होना चाहिए. वास्तु के अनुसार, द्वार की दिशा, उसकी लंबाई-चौड़ाई, ऊँचाई और आसपास की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है. सही तरीके से सजाए गए द्वार से धन, स्वास्थ्य और करियर में उन्नति संभव है, जबकि अनदेखी से बाधाएं और परेशानियां बढ़ सकती हैं.

मुख्य द्वार की दिशा

वास्तु के अनुसार, घर का मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में होना सबसे शुभ माना जाता है. ये दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाती हैं. दक्षिण और पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश करवा सकती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि घर का मुख्‍य द्वार सही दिशा में होने से परिवार के सभी सदस्यों का स्वास्थ्य और करियर बेहतर होता है.

द्वार का आकार और उंचाई

मुख्य द्वार का आकार बड़ा और ऊँचा होना चाहिए. ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और घर में तरक्की के अवसर आते हैं. बहुत छोटा या अति सजावट वाला द्वार नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. वास्तु के अनुसार, द्वार के सामने कोई बाधा या झंडे नहीं होने चाहिए.

रंग और सजावट का महत्व

मुख्य द्वार के रंग में हल्के और सकारात्मक रंग जैसे पीला, हरा या हल्का नीला शुभ माने जाते हैं. द्वार पर धार्मिक प्रतीक, जैसे ओम, स्वास्तिक या कलश लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. लाल या काले रंग से बचना चाहिए, क्योंकि यह नकारात्मकता ला सकता है.

सफाई और रख-रखाव

मुख्य द्वार हमेशा साफ-सुथरा और खुला होना चाहिए. धूल, जाले या टूट-फूट द्वार पर नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है. नियमित सफाई और द्वार के हैंडल, ताले आदि की मरम्मत सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करती है.

द्वार के आसपास की जगह

मुख्य द्वार के पास खुला और व्यवस्थित स्थान होना चाहिए. पेड-पौधे और अच्छी रोशनी सकारात्मक वाइब्स बढ़ाते हैं. इसके अलावा द्वार के सामने कभी भी भारी वस्तुएँ या अवरोध नहीं होने चाहिए, जिससे ऊर्जा का प्रवाह बाधित नहीं हो.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.