नई दिल्ली: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस बार सावन अमावस्या का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इसे विशेष माना जा रहा है. यह ग्रहण कई मायनों में खास रहेगा. ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और कर्क राशि में बने चतुर्ग्रही योग के दौरान लगेगा. हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ राशियों पर इसके प्रभाव को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
वैदिक पंचांग के अनुसार सावन अमावस्या 12 अगस्त 2026 को पड़ रही है. अमावस्या तिथि 12 अगस्त को रात 1:52 बजे शुरू होकर उसी दिन रात 11:06 बजे तक रहेगी. इसी दिन वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण लगेगा. सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर ही पड़ता है.
ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा. सामान्य तौर पर सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले शुरू माना जाता है. लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा.
यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगेगा. ग्रहण के समय सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु एक ही राशि में मौजूद रहेंगे, जिससे चतुर्ग्रही योग बनेगा. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस तरह का संयोग विशेष महत्व रखता है. इसी कारण इस ग्रहण को वर्ष 2026 की महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में शामिल माना जा रहा है.
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस ग्रहण का प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों पर अधिक पड़ सकता है. 12 अगस्त से अगले छह महीने तक इन राशि वालों को स्वास्थ्य, करियर, मान-सम्मान और आर्थिक मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. धन हानि, तनाव, संपत्ति विवाद या अन्य चुनौतियों की आशंका जताई गई है.
मान्यताओं के अनुसार जिन राशियों पर ग्रहण का प्रभाव बताया गया है, उन्हें छह महीने तक भगवान शिव की नियमित पूजा करने की सलाह दी गई है. प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर जलाभिषेक करने और श्रद्धा के साथ शिव आराधना करने को शुभ माना गया है. मान्यता है कि इससे ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है.
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. इसकी जानकारी विभिन्न मान्यताओं और उपलब्ध स्रोतों से ली गई है. हम इन दावों की पूर्ण सत्यता या वैज्ञानिक प्रमाण का दावा नहीं करते. किसी भी निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें.